मेरठ जिला जेल में कैदी दिवाली की तैयारियों में जुटे हैं। कैदी दीये, मोमबत्तियां, सजावटी मालाएं और रंगोली पोस्टर बना रहे हैं। इन सामानों को जेल के बिक्री केंद्रों के जरिये बेचा जाता है और कैदियों को इसके बदले मजदूरी मिलती है।
मुस्कान और रवीता भी बना रहीं दीये
दीये बनाने वालों में मुस्कान रस्तोगी और रवीता भी शामिल हैं। दोनों को अपने प्रेमियों के साथ ब्लू ड्रम हत्या मामले और सांप काटने वाले हत्या मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। ये दोनों भी जेल में दिवाली की तैयारियों में हिस्सा ले रही हैं।
जेल की बेकरी में 30 तरह के बिस्कुट
जेल की बेकरी में भी दिवाली की तैयारियां चल रही हैं। बेकरी में करीब 30 तरह के बिस्कुट बनाए जा रहे हैं, जिनमें मेरठ की मशहूर नान खटाई भी शामिल है। ये बिस्कुट भी जेल के बिक्री केंद्रों से बेचे जाएंगे।
काम, कमाई और कौशल का मकसद
वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने कहा कि इसका मकसद कैदियों को काम, कमाई और व्यावसायिक कौशल देना है। इससे कैदियों के पुनर्वास में मदद मिलती है। जेल में काम करने से कैदी न सिर्फ कमाई करते हैं, बल्कि एक हुनर भी सीखते हैं।
दिवाली पर जेल में रौनक
दिवाली के मौके पर जेल में भी रौनक देखने को मिल रही है। कैदी अपने हाथों से बनाए गए दीयों और सजावटी सामान से त्योहार की तैयारी कर रहे हैं। जेल प्रशासन का कहना है कि इस तरह के काम कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।
पुनर्वास की दिशा में कदम
जेल में दीये और बिस्कुट बनाने का काम कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। काम और कमाई से कैदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद भी रोजगार का रास्ता मिल सकता है।