दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ एक वीडियो को लेकर केस दर्ज किया है, जिसे पुलिस कथित तौर पर छेड़छाड़ किया हुआ और उनके सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया बता रही है।

पुलिस का आरोप है कि इस क्लिप में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को भारत की आलोचना करते हुए गलत तरीके से दिखाया गया है, जिसमें देश के आंतरिक मामलों और तेल खरीद का मुद्दा भी शामिल है।

4 नवंबर को प्रकाशित खबर के अनुसार यह केस स्पेशल सेल थाने में एफआईआर नंबर 263/26 के रूप में दर्ज किया गया है।

पुलिस का आरोप और लगाई गई धाराएं

खबर के अनुसार पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं का हवाला दिया है, जिनमें जालसाजी, सार्वजनिक शरारत, मानहानि और पहचान से जुड़े अपराधों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

खबर में कहा गया है कि यह मामला 3 नवंबर को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान सामने आया, जब स्पेशल सेल की आईएफएसओ इकाई को यह वीडियो प्रसारित होता मिला।

पुलिस का आरोप है कि इस वीडियो के जरिए भ्रामक, मानहानिकारक और भड़काऊ सामग्री फैलाई जा रही थी, जिससे अफवाहें और जनता में अशांति पैदा हो सकती थी। यह आरोप पुलिस का दावा है, कोई तय निष्कर्ष नहीं है, क्योंकि जांच जारी है।

केस से पहले आया फैक्ट चेक

विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने इससे पहले इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ बताया था और सोशल मीडिया यूजर्स को इसके कथित बयानों पर भरोसा करने या इन्हें साझा करने से आगाह किया था।

खबर में यह भी कहा गया है कि रूसी दूतावास ने भी इस वीडियो को फर्जी और एडिट किया हुआ बताया था। इस क्लिप में कथित तौर पर लावरोव को यह कहते दिखाया गया था कि भारत के साथ रूस के व्यापारिक संबंध नई दिल्ली को मास्को की विदेश नीति में दखल देने या रूस, यूक्रेन, अमेरिका या अन्य देशों के बारे में सलाह देने का अधिकार नहीं देते।

इसी खबर के अनुसार विदेश मंत्री एस. जयशंकर से जुड़ा एक अलग छेड़छाड़ वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिससे फैक्ट चेक इकाई की चेतावनी और अहम हो जाती है।

आगे क्या होगा

खबर के अनुसार पुलिस अब इस वीडियो के स्रोत और प्रसार की जांच कर रही है। 4 नवंबर के लेख के समय तक जांच का कोई नतीजा सामने नहीं आया था।

यह केस इस बात पर टिका है कि क्या यह क्लिप छेड़छाड़ वाली थी और इसे किसने बनाया और फैलाया। इन सवालों का जवाब सिर्फ जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही मिलेगा। तब तक इस वीडियो को कथित तौर पर छेड़छाड़ वाला कहना चाहिए, और इसमें दिखाए गए बयानों को लावरोव के अपने शब्दों के रूप में पेश नहीं करना चाहिए।

पाठकों के लिए समय का क्रम अहम है। वीडियो 3 नवंबर को साझा हुआ, इसके बाद फैक्ट चेक आया, और पुलिस केस 4 नवंबर को सामने आया। इस खबर में यही क्रम रखा गया है, ताकि केस को फैक्ट चेक से पहले का न समझा जाए।