नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में आज 1 नवंबर 2026 कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली होने जा रही है। कांग्रेस और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह प्रदर्शन आयोजित किया है। रैली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी गठबंधन के कई दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

विपक्षी गठबंधन की ओर से इस रैली में करीब 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया गया है। वहीं इस रैली को लेकर दिल्ली के व्यापार संगठनों और बीजेपी ने कारोबार प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने की खरीदारी की अपील

उधर राहुल गांधी ने भी कारोबार के जुड़ी एक्स पर एक पोस्ट की है। उन्होंने रैली में आने वाले लाखों लोगों से अपील की है, त्यौहारों का मौसम है। दिवाली, छठ, भाईदूज का समय है। मैं चाहता हूं जो लाखों लोग बाहर से दिल्ली आ रहे हैं, वो यहां के व्यापारियों की मदद करें। प्रोटेस्ट, मार्च, रैली कीजिए, साथ में थोड़ी सी खरीदारी भी कीजिए, व्यापारियों का फायदा हो जाएगा।

वहीं कुछ अनुमान बताते हैं कि रैली या कुछ दूसरे काम से अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले लोग कुछ न कुछ खरीदकर जाते हैं। वहीं अगर राहुल गांधी की भी अपील काम कर गई, तो दिल्ली के व्यापारियों को इस रैली से बंपर फायदा हो सकता है।

व्यापारियों को डर, बाजार ठप होने की आशंका

रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली से राजधानी के करीब 20 बड़े बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारिक संगठनों का दावा है कि इससे रोजाना 10000 से 12000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक रैली के कारण चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार, खारी बावली, कनाट प्लेस और दरियागंज जैसे प्रमुख बाजारों में व्यापार ठप होने की आशंका है। इन बाजारों में दिवाली के दौरान ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में ट्रैफिक जाम, रास्तों की बंदी और पुलिस की पाबंदियों से दुकानों तक ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

10 लाख लोग और हजारों वाहन आने का अनुमान

व्यापारिक संगठनों के अनुसार रैली में करीब 10 लाख लोगों के पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा 15000 से 20000 वाहनों के आने की संभावना जताई गई है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही से मध्य दिल्ली में भारी जाम लग सकता है। इसका असर बाजारों के साथ माल की आवाजाही पर भी पड़ सकता है।

दिल्ली में अमूमन बड़े बाजार रविवार को भी खुलते हैं, और त्योहारी सीजन में बड़े बाजारों में भारी भीड़ रहती है। व्यापारियों का कहना है कि भीड़, डायवर्जन और पाबंदियों का मेल इस रैली को उनके लिए कारोबारी जोखिम बनाता है, जबकि विपक्ष को उम्मीद है कि उसका राजनीतिक संदेश और राहुल गांधी की खरीदारी की अपील असर को नरम करेगी।