90 के दशक की बात है। फैंटम स्वीट सिगरेट्स ने बच्चों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली थी। यह थी तो कैंडी, लेकिन दिखती हूबहू सिगरेट जैसी थी। इसी के कारण इसके इर्द-गिर्द विवाद बने रहे। लाल-सफेद डिब्बे में यह मिलती थी। सिगरेट की तरह दिखने वाली फैंटम कैंडी बच्चों के बीच 'कूल' दिखने का जरिया बन गई थी। हालांकि, बचपन की मीठी यादों से जुड़ी इस कैंडी पर सेहत और बच्चों में स्मोकिंग को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे।

फैंटम सिगरेट कैंडीज ने एक समय भारतीय बाजार में धूम मचा रखी थी। इसकी सबसे बड़ी यूएसपी इसका असली सिगरेट की तरह दिखना था। पैकेजिंग भी वैसी ही थी जैसी असल सिगरेट बॉक्स की होती है। इसके पैकेट पर मास्क वाला मस्कट होता था। यह 1930 के दशक के लोकप्रिय कॉमिक्स किरदार 'फैंटम' से प्रेरित था। 90s के दौर के बच्चों के लिए इसे उंगलियों के बीच दबाकर बड़ों की नकल करना एक स्टाइल स्टेटमेंट हुआ करता था। हालांकि, बच्चों के इस तरह के दिखावा करने और इसे कूल मानने के ट्रेंड ने माता-पिता और हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता को बढ़ा दिया था।

स्टडी का लिंक और कम से कम 13 देशों में बैन

फिर इन कैंडीज का कड़ा विरोध हुआ। आरोप लगा कि ये बच्चों में स्मोकिंग की आदत को बढ़ावा देती हैं। अमेरिका के रोचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस पर एक स्टडी की। इसमें यह बात सामने आई थी कि बचपन में कैंडी सिगरेट का सेवन करने वाले वयस्कों में धूम्रपान करने की संभावना उनसे ज्यादा होती है जिन्होंने कभी इसका सेवन नहीं किया था। बच्चों के मन में इसके प्रति आकर्षण को कई देशों ने खतरा मान लिया। इनमें कनाडा, ब्राजील, तुर्की और न्यूजीलैंड सहित कम से कम 13 देश शामिल थे। इन्होंने इस कैंडी सिगरेट पर बैन लगा दिया।

80% तक सिर्फ चीनी, आज भी ऑनलाइन उपलब्ध

हेल्थ के लिहाज से भी ये कैंडीज बहुत नुकसानदेह साबित हुई हैं। इन्हें बनाने वाली पुणे की 'हार्निक जनरल फूड्स फैक्ट्री' के प्रवक्ता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इन कैंडीज में 75 से 80 फीसदी तक सिर्फ चीनी होती है। बाकी हिस्सा ग्लूकोज और जिलैटिन का है। बहुत ज्यादा मात्रा में शुगर और ग्लूकोज के सेवन से बच्चों में मोटापा, दांतों का सड़ना, इम्युनिटी कमजोर होना और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

सामान्य दुकानों पर इनकी उपलब्धता भले कम हो गई है। लेकिन, आज भी ये कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मिल जाती हैं। जानकार मानते हैं कि बचपन की सुनहरी यादों के नाम पर इस तरह के अनहेल्दी प्रोडक्ट्स का सेवन सेहत के लिए उचित नहीं है। यही वजह है कि जो लोग स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक हैं, वे अब ऐसी पुरानी और हानिकारक आदतों से दूरी बनाने की सलाह देते हैं।