नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आंध्र प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह 22 अक्टूबर तक तय करे कि शहरी निकाय चुनावों में उन जगहों पर नामांकन की समय-सीमा बढ़ाई जाए या नहीं, जहां उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से कथित तौर पर रोका गया था। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर रोक लगा दी और पुलिस महानिदेशक को नामांकन केंद्रों पर पुलिस सुरक्षा और CCTV निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत YSR कांग्रेस पार्टी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप है कि 16 से 18 अक्टूबर के बीच नामांकन के दौरान हिंसा और धमकी के जरिए उसके उम्मीदवारों को रोका गया।

अदालत ने क्या निर्देश दिए

पीठ ने कहा कि अगर आयोग समय-सीमा बढ़ाने का फैसला करता है तो उम्मीदवारों को फैसले के प्रकाशन से कम से कम 48 घंटे का समय देना होगा। अदालत ने माना कि निर्देश जारी करने के लिए शुरुआती आधार बनता है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा हुई या नहीं, इस पर उसने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। आरोपों की जांच अब चुनाव आयोग को करनी है।

आयोग और राज्य सरकार को 27 अक्टूबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है, उसी दिन मामले की अगली सुनवाई होगी।

YSRCP के आरोप और हाई कोर्ट तक का सफर

YSRCP की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने पीठ को बताया कि पार्टी के करीब 63% उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। उन्होंने कहा कि कडपा में नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए और तिरुपति, पुंगनूर और रायाचोटी में उम्मीदवारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें रोका गया। तिरुपति के नौ उम्मीदवारों ने आरोपों के समर्थन में हलफनामे दिए हैं।

पार्टी ने सबसे पहले 10 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और चुनावों के लिए अतिरिक्त नामांकन केंद्रों की मांग की थी। एकल पीठ ने 15 अक्टूबर को याचिका खारिज कर दी, जबकि खंडपीठ ने 18 अक्टूबर को एक दिन की मोहलत देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि इससे चल रही चुनाव प्रक्रिया में दखल होगा। इसके बाद पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

इस बीच, खबरों के मुताबिक पुलिवेंदुला में नामांकन वापसी की समय-सीमा से पहले YSRCP उम्मीदवारों के घरों के पास वाहनों में आग लगा दी गई। पार्टी ने इसका आरोप TDP कार्यकर्ताओं पर लगाया है, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।

राज्य सरकार का पक्ष और पीठ की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने अदालत में याचिका का विरोध किया। वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने आरोप लगाया कि हिंसा याचिकाकर्ता पार्टी ने खुद भड़काई थी, जबकि मुकुल रोहतगी ने कहा कि YSRCP चुनावों को लेकर मीडिया में मुद्दा खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

पीठ ने यह दलील नहीं मानी कि उसे मामले से दूर रहना चाहिए। पीठ ने टिप्पणी की कि संवैधानिक अदालतों के हाथ बंधे नहीं होते, जब यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप जरूरी हो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असंवैधानिक या अवैध तरीकों से दूषित न हों।

आयोग का फैसला और आगे की राह

आमतौर पर अदालतें चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद हस्तक्षेप से बचती हैं और हाई कोर्ट ने इस मामले में दो बार यही रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस दलील पर टिका है कि किसी उम्मीदवार को नामांकन ही न करने देना चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। अंतिम सूची पर रोक लगने से नगर निकाय चुनावों का घोषित कार्यक्रम भी बिगड़ गया है।

यह चुनाव सत्तारूढ़ TDP नीत NDA और विपक्षी YSRCP के बीच प्रतिष्ठा का मुकाबला माना जा रहा है। 22 अक्टूबर को आयोग का फैसला तय करेगा कि विवादित इलाकों में कम से कम 48 घंटे की नई नामांकन विंडो खुलेगी या नहीं, और इसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची की नई तारीख आएगी।