लखनऊ/नागपुर: लखनऊ के व्यवसायी और कैफे मालिक शिवा शर्मा की मौत के मामले में मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे को महाराष्ट्र में गिरफ्तारी के बाद बुधवार को नागपुर की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मिल गया। इसी अभियान में उनकी बहन रश्मि दुबे और उनके ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को भी गिरफ्तार किया गया है। तीनों को अब लखनऊ लाया जाएगा, जहां मामले की जांच चल रही है।
11 दिन की तलाश के बाद नागपुर में गिरफ्तारी
तीनों को 20 अक्टूबर को नागपुर में उत्तर प्रदेश STF और लखनऊ पुलिस की संयुक्त टीम ने नागपुर पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया। जांचकर्ता कई दिनों से उनकी तलाश में थे और यह तलाशी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई ठिकानों के साथ-साथ भारत-नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों तक फैली थी।
खबरों के मुताबिक, श्रद्धा के नाम पर पंजीकृत एक वाहन नेपाल सीमा के पास बहराइच जिले के रुपईडीहा के पास लावारिस मिला था। वहां से जांचकर्ताओं ने तीनों की गतिविधियों के सुराग खंगाले और अंत में नागपुर में उनका पता लगाया।
गिरफ्तारी के बाद तीनों को उत्तर प्रदेश ले जाने की कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए नागपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड से दोष सिद्ध नहीं होता, और मामले के आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही पुष्टि होगी।
ट्रांजिट रिमांड क्या होता है
ट्रांजिट रिमांड वह कानूनी प्रक्रिया है, जिससे पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी की जगह से उस क्षेत्र में ले जा सकती है, जहां आपराधिक मामला दर्ज है। जब कोई व्यक्ति एक राज्य में गिरफ्तार होता है, लेकिन उस पर मामला दूसरे राज्य में चल रहा होता है, तो पुलिस उसे जांच वाले क्षेत्र में ले जाने के लिए अदालत की अनुमति लेती है।
इस मामले में नागपुर की कार्यवाही से उत्तर प्रदेश पुलिस श्रद्धा दुबे और अन्य दो आरोपियों को लखनऊ ले जा सकेगी। लखनऊ पहुंचने के बाद जांचकर्ता उनसे शिवा शर्मा की मौत की परिस्थितियों पर पूछताछ कर सकेंगे और अब तक जुटाए गए सबूतों की जांच कर सकेंगे।
9 अक्टूबर की मौत और परिवार की शिकायत
शिवा शर्मा की मौत 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के हजरतगंज इलाके के बालू अड्डा स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट्स की चौथी मंजिल से गिरने से हुई थी। इसके बाद उनकी मां रंजना शर्मा ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि मौत से पहले उनके बेटे को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया था।
शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया। परिवार ने आरोप लगाया है कि शिवा की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी, और उनके गिरने की परिस्थितियों की गहन जांच की मांग की है। ये आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं, और असल में क्या हुआ था, यह तय करने के लिए जांचकर्ताओं को चिकित्सीय साक्ष्य, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री की जांच करनी होगी।
श्रद्धा का इनकार और जांच के घेरे में सबूत
गिरफ्तारी से पहले श्रद्धा दुबे ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने दावा किया कि शिवा ने आत्महत्या की थी और कहा कि अपार्टमेंट के CCTV फुटेज से उनके पक्ष की पुष्टि हो सकती है। उन्होंने परिवार के आरोपों को गलत बताया और शिवा के साथ अपने रिश्ते को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए। उनके बयान उनका बचाव पक्ष हैं और उनसे यह स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं होता कि शिवा की मौत कैसे हुई।
अपार्टमेंट परिसर की CCTV रिकॉर्डिंग, निवासियों और अन्य गवाहों के बयान, चिकित्सीय निष्कर्ष और डिजिटल साक्ष्य इस जांच के केंद्र में रहने की उम्मीद है। खबरों में शिवा के परिवार द्वारा कथित तौर पर सौंपे गए WhatsApp चैट का भी जिक्र है, जिनकी प्रामाणिकता, संदर्भ और मामले से प्रासंगिकता की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी। अगला चरण लखनऊ में तीनों आरोपियों से पूछताछ है, जिससे जांचकर्ता दोनों पक्षों के दावों को उपलब्ध सबूतों से मिलाकर देखेंगे।