नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका बुधवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा हो गए। दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने पुलिस की तीन दिन और हिरासत बढ़ाने की मांग ठुकरा दी और दोनों नेताओं को 50,000 रुपये के निजी बांड और इतनी ही राशि के जमानत बांड पर रिहा करने का आदेश दिया। दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे और जब तक जंतर मंतर विरोध स्थल की सूची से बाहर है, वहां विरोध के लिए आह्वान नहीं करेंगे। दोनों नेता जंतर मंतर विरोध मामले में सात दिन न्यायिक हिरासत में रहे, और उनके खिलाफ कार्यवाही जारी है, जिसकी अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को है।
पुलिस ने मांगे थे तीन दिन और, कोर्ट ने कहा बांड ही काफी
दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि नेताओं के पिछले आचरण और मीडिया में दिए बयानों को देखते हुए शांति भंग की आशंका बनी हुई है। पुलिस ने यह भी कहा कि दास और रंका ने अदालत और मीडिया के सामने ऐसी गतिविधियों से दूर रहने को लेकर विरोधाभासी बयान दिए हैं, और CJP के एक अन्य सदस्य के मीडिया बयान को अदालत के अधिकार को कमजोर करने वाला बताया।
दास और रंका के वकील ने बिना शर्त माफी मांगी और अदालत को आश्वासन दिया कि ऐसा आचरण दोबारा नहीं होगा। इसके बाद SEM रितु राज ने रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि शांति भंग रोकने के लिए जरूरी उपाय बांड और लिखित आश्वासनों से पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जा सकते हैं, और इस चरण पर और न्यायिक हिरासत जरूरी नहीं लगती।
रिहाई के साथ जुड़ी शर्तें
अलग-अलग लिखित आश्वासनों में दोनों नेताओं ने वादा किया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और विशेष रूप से यह माना कि जब तक जंतर मंतर कानून के अनुसार विरोध स्थल की सूची से बाहर है, वे वहां विरोध का आह्वान नहीं करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका और उसके संस्थानों में अपना विश्वास जताया और यह भी माना कि वे जो भी विरोध आयोजित करेंगे, वह संवैधानिक ढांचे के भीतर रहेगा।
बांड जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेंगे। दोनों नेताओं को शर्तों का पालन करना होगा, हर सुनवाई में पेश होना होगा, और उनके जमानतदारों को भी अगली सुनवाई में पेश होना होगा। जांच अधिकारी को जमानतदारों पर सत्यापन रिपोर्ट देने को कहा गया है।
दोनों नेता हिरासत में क्यों लिए गए थे?
दास और रंका को 13 अक्टूबर को जंतर मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। जंतर मंतर को दो दिन पहले ही विरोध स्थलों की सूची से हटाया गया था। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 19 अक्टूबर को उनके जमानतदार खारिज होने के बाद हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी, और यह अवधि बुधवार को खत्म हो रही थी।
दोनों ने हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन बुधवार दोपहर उन्होंने वह याचिका वापस ले ली, SEM अदालत के रिहाई आदेश से कुछ घंटे पहले। यह मामला मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए CJP के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है।
डिपके, रत्ना सिंह और केजरीवाल की प्रतिक्रिया
CJP ने आदेश का स्वागत किया। पार्टी संस्थापक अभिजीत डिपके ने दोनों नेताओं को खुद से "कहीं बड़े नेता" बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों की तस्वीर साझा करते हुए कहा, "सौरव और आशु सिर्फ बेहतर नहीं हैं, वे मुझसे कहीं बड़े नेता हैं। आपके आदेशों का पालन करके खुश हूं, मेरे नेताओं। जान हाजिर है!"
पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि यह फैसला पहले आना चाहिए था। उन्होंने कहा, "हम फैसले का स्वागत करते हैं। मुझे लगता है कि यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था, लेकिन देर नहीं हुई है।" उन्होंने यह भी कहा कि टीम भावुक है और दोनों नेताओं से मिलने को उत्सुक है। AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी आदेश का स्वागत किया और कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। तिहाड़ से बाहर निकलते समय रंका "इंकलाब जिंदाबाद" का नारा लगाते सुने गए।
रिहाई का मतलब बरी होना नहीं, सुनवाई 23 अक्टूबर को
दास और रंका के खिलाफ कार्यवाही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 और 135 के तहत रोकथाम प्रकृति की है, जो शांति बनाए रखने के लिए बांड से जुड़ी हैं। ये अपने आप में कोई आपराधिक दोषसिद्धि नहीं हैं, और बुधवार के आदेश से दोनों नेता बरी नहीं हुए हैं और मामला भी बंद नहीं हुआ है।
अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तय है, जिसमें जमानतदारों के सत्यापन और अन्य प्रक्रियात्मक मामलों पर विचार होने की उम्मीद है। जांच पूरी होने तक नेता अपने बांड और आश्वासनों की शर्तों से बंधे रहेंगे।