साई पल्लवी जल्द ही फिल्म रामायणम् में मां सीता के किरदार में नजर आएंगी। इस किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ एक फिल्म का हिस्सा बनने जैसा नहीं बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है। साई पल्लवी ने बताया कि इस सम्मानित किरदार को पूरी गरिमा के साथ पर्दे पर उतारने के लिए उन्होंने मेडिटेशन का सहारा लिया।
उनका मानना है कि यह फिल्म सिर्फ एक सिनेमाई अनुभव नहीं होगी बल्कि इतिहास का हिस्सा बनेगी, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी देखेंगी। इसी सोच ने उनके किरदार के प्रति नजरिए को आकार दिया।
परफॉर्मेंस से पहले प्रार्थना
साई पल्लवी हाल ही में लोकप्रिय क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में पहुंचीं। यहां उन्होंने शो के होस्ट और मेगास्टार अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत के दौरान सीता मां का किरदार निभाने की अपनी तैयारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस भूमिका को लेकर उनके मन में काफी सम्मान और जिम्मेदारी का भाव था।
साई ने कहा, इस किरदार के लिए मैंने सिर्फ प्रार्थना की। मैंने भगवान से यही मांगा कि इसे निभाने के दौरान मेरे सामने जितनी भी मुश्किलें आएं, वे दूर हो जाएं। वह चाहती थीं कि इस किरदार को निभाते समय किसी तरह की बाधा न आए और वह इसे पूरी गरिमा के साथ पर्दे पर उतार सकें।
एक ऐसी फिल्म जो बनाने वालों से आगे रहेगी
साई पल्लवी ने कहा कि हम जो फिल्म बना रहे हैं, वह सिर्फ एक फिल्म नहीं है बल्कि इतिहास का हिस्सा भी बनेगी। आने वाली पीढ़ियां और भविष्य के लोग भी इसे देखेंगे, उन्होंने कहा, उस समय हममें से कोई यहां नहीं होगा लेकिन फिल्म रहेगी।
इसीलिए उस किरदार में गरिमा होनी चाहिए, उन्होंने कहा, इसी वजह से वह इस भूमिका के लिए सिर्फ प्रार्थना कर रही थीं। यह सोच कि फिल्म अपने बनाने वालों के बाद भी जीवित रहेगी, ने उनकी तैयारी को गंभीरता दी।
दबाव में शांत रहने के लिए मेडिटेशन
एक्ट्रेस ने बताया कि सीता मां का किरदार निभाते हुए उन्होंने मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। इससे उन्हें अपने विचारों को शांत रखने और मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालने में मदद मिली।
साई ने कहा, असल में मेडिटेशन न करने पर मेरे मन में और ज्यादा विचार आने लगते हैं। इसलिए सीता मां का किरदार निभाते समय भी वह ज्यादातर मेडिटेशन करती थीं। इस भूमिका से उन्होंने सीखा कि जब भी आप किसी तनावपूर्ण स्थिति में हों, तो उस पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसे सिर्फ देखना और समझना चाहिए।
जब भी उनके सामने कोई मुश्किल या तनावपूर्ण स्थिति आती थी, तो वह सोचती थीं कि सीता मां ऐसी परिस्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देतीं। उन्हें लगता है कि उनके किरदार से उन्होंने यही सबसे बड़ी बात सीखी है।