अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनावों ने डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा झटका दिया है। डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, कंसास, साउथ कैरोलिना, आयोवा, नॉर्थ कैरोलिना और ओहायो जैसे रिपब्लिकन गढ़ों में जीत दर्ज करके कांग्रेस के दोनों सदनों पर कब्जा कर लिया है।

डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट, दोनों पर कब्जा कर लिया है। रिपब्लिकन पार्टी अब कांग्रेस में अल्पमत में रहते हुए और अपने भीतर उभर रहे प्रतिस्पर्धी सत्ता केंद्रों से जूझने की दोहरी चुनौती का सामना कर रही है, क्योंकि नेता और गुट ट्रंप के बाद के अमेरिका के लिए खुद को तैयार करने लगे हैं।

यह फैसला ट्रंप के नेतृत्व के साथ-साथ अर्थव्यवस्था, ईरान युद्ध और शासन के तरीके को लेकर मतदाताओं की नाराजगी के बारे में भी था। ट्रंप इसे अपने नाम पर जनमत संग्रह के रूप में पेश करना चाहते थे, लेकिन यह उनकी राष्ट्रपति पद की अस्वीकृति में बदल गया।

सात सीनेट सीटें और दो दर्जन से ज्यादा हाउस सीटें पलटीं

शुरुआती अनुमानों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने सात सीनेट सीटें और दो दर्जन से ज्यादा हाउस सीटें पलटी हैं। टेक्सास में राज्य प्रतिनिधि जेम्स टैलारिको ने अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन को हराकर 38 साल से चला आ रहा रिपब्लिकन सीनेट का सिलसिला तोड़ दिया। जीना हिनोजोसा ने तीन बार के गवर्नर ग्रेग एबॉट को हरा दिया।

कंसास में एडम हैमिल्टन महामंदी के बाद सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले डेमोक्रेट बने। बाल रोग विशेषज्ञ एनी एंड्रयूज ने साउथ कैरोलिना में जीत दर्ज की, जो वहां करीब तीन दशकों में पहली डेमोक्रेट सीनेट जीत है। आयोवा, नॉर्थ कैरोलिना और ओहायो में भी ऐसे ही उलटफेर हुए।

हकीम जेफ्रीज बन सकते हैं पहले अश्वेत स्पीकर

हाउस अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीज नई कांग्रेस के जनवरी में बैठने पर हाउस के पहले अश्वेत स्पीकर बनने की स्थिति में हैं। सीनेट अल्पसंख्यक नेता चक शूमर बहुमत नेता की भूमिका फिर से संभालने की तैयारी में हैं।

जेफ्रीज ने समर्थकों से कहा कि नतीजों से पता चलता है कि अमेरिकियों को उग्रवाद और भ्रष्टाचार से काफी हो चुका है। उन्होंने किफायत, स्वास्थ्य सेवा और निगरानी पर ध्यान देने का वादा किया। शूमर ने कहा कि राहत आ रही है।

अब डेमोक्रेट्स के हाथ में क्या होगा

दोनों सदनों में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को समन शक्ति, समितियों पर नियंत्रण और ट्रंप के नामांकनों को रोकने या धीमा करने की क्षमता मिलेगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की रिक्तियां और कैबिनेट नियुक्तियां भी शामिल हैं। प्रशासन की नीतियों, ईरान युद्ध और पारिवारिक कारोबार से जुड़ी जांच की उम्मीद है।

ट्रंप के पास वीटो का अधिकार और कार्यपालिका के व्यापक साधन बने रहेंगे। यह स्थिति उनके पहले कार्यकाल के दूसरे हिस्से जैसी है, जब डेमोक्रेट हाउस ने उन्हें रोका था और दो बार उन पर महाभियोग भी चलाया था। अब उनके पास सीनेट का दबाव भी होगा।

ट्रंप ने Truth Social पर लिखा कि वह मतपत्र पर नहीं थे और अगर वह होते तो भारी बहुमत से जीतते। इससे पहले वह मतदाताओं से मध्यावधि चुनावों को अपने लिए प्रॉक्सी चुनाव मानने की अपील करते रहे थे।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को लंबे समय से ट्रंप का उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन अब एक अलोकप्रिय राष्ट्रपति पद और पार्टी की ऐतिहासिक हार से जुड़ाव ने उनकी स्थिति को जटिल बना दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ज्यादा पारंपरिक छवि वाले संभावित प्रतिद्वंद्वी बने हुए हैं।

फ्लोरिडा के रॉन डेसेंटिस और टेक्सास के सीनेटर टेड क्रूज भी ट्रंप के बाद के परिदृश्य को लेकर चर्चा में हैं। टेड क्रूज ने नतीजों को ब्लू सुनामी और वाटरगेट स्तर की अस्वीकृति बताया। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन इसलिए नहीं हारे कि उनके समर्थक घर बैठे रहे, बल्कि इसलिए हारे कि पहले पार्टी का साथ देने वाले मतदाताओं ने डेमोक्रेट्स की ओर रुख कर लिया।

क्रूज ने जीवन यापन की लागत, भ्रष्टाचार, ईरान युद्ध और टैरिफ को मतदाताओं की नाराजगी की वजह बताया। उन्होंने कहा कि कंसास के एग्जिट पोल में किफायत सबसे बड़ी चिंता के रूप में उभरी। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के पुनर्निर्माण की अपील की और माना कि पार्टी ने ब्लू-कॉलर कामगारों, युवा मतदाताओं, किसानों, ग्रामीण समुदायों और हिस्पैनिक मतदाताओं समेत अपने कई पारंपरिक समर्थकों को दूर कर दिया है।

2028 की ओर क्या संकेत

रिपब्लिकन रणनीतिकारों का कहना है कि अब पार्टी को राजकोषीय रूढ़िवाद की ओर लौटना होगा और ट्रंप के ब्रांड के सबसे विवादास्पद तत्वों से जुड़े उम्मीदवारों को हटाना होगा। दूसरे रणनीतिकारों ने चेतावनी दी कि ट्रंप की व्यक्तिगत पकड़ आसानी से खत्म नहीं होगी। ईरान युद्ध, टैरिफ और आर्थिक असंतोष ने 2024 की जीत दिलाने वाले गठबंधन को बांट दिया है।

काउंटी स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के जीते हुए इलाकों में भी 2024 के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया। अब नई ताकत के केंद्र उभर रहे हैं: बचे हुए रिपब्लिकन समिति सदस्य, वे गवर्नर जो चुनाव जीत गए, और वे दानदाता नेटवर्क जो 2028 के लिए संसाधनों का फैसला करेंगे।

ट्रंप के जाने के बाद भी उनके आंदोलन की राजनीतिक मशीनरी को जिंदा रखने के लिए रूढ़िवादी रणनीतिकार क्रिस बस्कर्क की ओर से स्थापित Rockbridge Network काम कर रहा है। इसके जुड़े धन जुटाने वाले समूह Turnout for America ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जमीनी स्तर के प्रयासों पर 34.5 मिलियन डॉलर खर्च किए थे। बस्कर्क अपने राजनीतिक दर्शन को अरिस्टोपॉपुलिज्म कहते हैं, जो धनी उद्यमियों की आर्थिक शक्ति को मजदूर वर्ग के मतदाताओं की चुनावी ताकत से जोड़ता है।

ट्रंप चुपचाप नहीं हटेंगे। उनके पास बुली पल्पिट, कार्यकारी कार्रवाई की क्षमता और व्यक्तिगत समर्थकों का बड़ा समूह है। 2026 की ब्लू वेव ने वह दौर खत्म कर दिया है, जिसमें ट्रंप की राष्ट्रपति पद बिना किसी सार्थक कांग्रेसी प्रतिरोध के चल रहा था। ट्रंप जनवरी 2029 तक व्हाइट हाउस में रहेंगे, लेकिन अब वह तेजी से लेम-डक राष्ट्रपति बनते जा रहे हैं।