रोजमर्रा के सामान का बाजार, जिसे FMCG सेक्टर कहा जाता है, सितंबर तिमाही में सुस्त पड़ा है। आंकड़ों से पता चलता है कि इस दौरान बिक्री मात्रा की वृद्धि एक साल पहले के मुकाबले कम हो गई। सबसे ज्यादा मार छोटी कंपनियों पर पड़ी है, जबकि बड़ी कंपनियां आगे निकलती दिख रही हैं।

Worldpanel by Numerator के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर तिमाही में FMCG सेक्टर की बिक्री मात्रा की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही। एक साल पहले इसी तिमाही में यह वृद्धि 4.7 प्रतिशत थी, और अप्रैल-जून 2026 में यह 5.2 प्रतिशत थी। यानी वृद्धि लगातार धीमी पड़ रही है।

बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का प्रदर्शन इससे अलग रहा। Hindustan Unilever की मात्रा वृद्धि 7 प्रतिशत रही, Marico का कारोबार 10 प्रतिशत बढ़ा, Godrej Consumer Products की बिक्री सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ी और Nestle India की मात्रा वृद्धि दो अंकों में रही।

किन श्रेणियों में कितनी वृद्धि

जुलाई-सितंबर 2026 में श्रेणीवार वृद्धि इस तरह रही: पर्सनल केयर 3.0 प्रतिशत, होम केयर 4.0 प्रतिशत और फूड एंड बेवरेजेज 3.5 प्रतिशत। एक साल पहले इन्हीं श्रेणियों में वृद्धि क्रमशः 4.4 प्रतिशत, 6.1 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून 2026 में यह 3.0 प्रतिशत, 5.4 प्रतिशत और 5.4 प्रतिशत थी।

शहरों और गांवों में क्या अंतर रहा

शहरी बाजारों में वृद्धि 3.5 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 5.2 प्रतिशत और अप्रैल-जून 2026 में भी 5.2 प्रतिशत थी। ग्रामीण बाजारों में वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 4.2 प्रतिशत और अप्रैल-जून 2026 में 5.3 प्रतिशत थी।

छोटी कंपनियां क्यों पिछड़ रही हैं

Parle Products के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा कि ऐसा लगता है कि ज्यादातर श्रेणियों में छोटी कंपनियां बड़ी कंपनियों से पिछड़ रही हैं, खासकर ग्रामीण बाजारों में, जहां ज्यादातर छोटी कंपनियां काम करती हैं। बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियों के पास संसाधन कम होते हैं, इसलिए बढ़ती लागत या आपूर्ति में रुकावट से निपटने की उनकी क्षमता कम होती है।

शाह ने यह भी कहा कि पिछले साल GST दर में कटौती के बाद छोटी कंपनियों ने दो महीने का स्टॉक कुछ ही दिनों में खाली कर दिया था, जिससे तुलना का आधार ऊंचा हो गया। Worldpanel ब्रांडेड और बिना ब्रांड वाले उत्पादों की बिक्री पर नजर रखता है, जिसमें खुले सामान भी शामिल हैं, जिससे खपत की व्यापक तस्वीर मिलती है।

बड़ी कंपनियों को फायदा, छोटी को नुकसान

Marico के प्रबंध निदेशक सौगत गुप्ता ने कहा कि महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों ने बड़ी कंपनियों की मदद की और छोटी व क्षेत्रीय कंपनियों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में छोटी और क्षेत्रीय कंपनियां आमतौर पर ज्यादा प्रभावित होती हैं, जबकि बड़ी कंपनियों को फायदा होता है।

स्टॉक, पैकेजिंग सामग्री और कमर्शियल गैस की कमी ने छोटी कंपनियों को ज्यादा प्रभावित किया। यही वजह है कि इस तिमाही में बड़े और छोटे खिलाड़ियों के बीच का अंतर साफ दिखा।