ओडिशा के सी वी रमन ग्लोबल विश्वविद्यालय (सीजीयू) के छात्रों ने इन-स्पेस द्वारा इसरो के सहयोग से उत्तर प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। विश्वविद्यालय की टीम ने रॉकेट लॉन्च के जरिए अपने स्वदेशी कैनसैट का सफल प्रदर्शन किया।

टीम ने प्रतियोगिता के तय तकनीकी मानकों को पूरा किया, जिनमें सेंसर का प्रदर्शन, लैंडिंग की व्यवस्था और अन्य तय मानदंड शामिल थे। कैनसैट एक छोटा उपग्रह होता है जो सॉफ्ट ड्रिंक के डिब्बे के आकार में बनता है, और उसे लॉन्च के बाद सुरक्षित उतरकर अपना काम पूरा करना होता है।

प्रतियोगिता में शुरुआती चरण में 69 विश्वविद्यालयों ने क्वालिफाई किया था, जिनमें से 43 फाइनल राउंड तक पहुंचे। आठ सदस्यीय सीजीयू टीम ने उन 43 फाइनलिस्टों में दूसरा स्थान हासिल किया। यह नतीजा ओडिशा के विश्वविद्यालय को देश की सर्वश्रेष्ठ छात्र अंतरिक्ष टीमों में शामिल करता है।

यह प्रतियोगिता इन-स्पेस द्वारा आयोजित की जाती है, जो भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी और छात्र भागीदारी को बढ़ावा देने वाली संस्था है, और इसरो के साथ काम करती है। इसकी राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं छात्रों को असली हार्डवेयर बनाने और उड़ाने का पहला मौका देती हैं।

इसरो वैज्ञानिकों के सामने प्रस्तुति का मौका

आठ सदस्यीय सीजीयू टीम उन पांच विश्वविद्यालयों में शामिल रही जिन्हें स्पेस एक्सपो 2026 के दौरान बेंगलुरु में इसरो वैज्ञानिकों के सामने अपनी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया। यह निमंत्रण टीम के डिजाइन की गुणवत्ता और उसके लॉन्च के नतीजों की पहचान थी।

छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग की स्मिता रानी परिजा और वीरेंद्र सिंह ने मार्गदर्शन दिया। उनके मार्गदर्शन से टीम ऐसा कैनसैट बना सकी जो रॉकेट लॉन्च को झेलकर उपयोगी डेटा वापस ला सके।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष संजीब कुमार राउत और कुलपति बंशीधर माझी ने टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी। यह नतीजा ओडिशा के विश्वविद्यालयों की छात्र अंतरिक्ष उपलब्धियों की बढ़ती सूची में एक और नाम जोड़ता है।

प्रतियोगिता में क्या परखा जाता है

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में छात्र टीमों को छोटे अंतरिक्ष मिशन के पूरे चक्र पर परखा जाता है, जिसमें कैनसैट को डिजाइन करना, बनाना, लॉन्च करना और उसे वापस पाना शामिल है। टीमों को यह दिखाना होता है कि उनके सेंसर काम करते हैं, लैंडिंग व्यवस्था पेलोड की रक्षा करती है और जुटाया गया डेटा सही है।

सीजीयू टीम का कैनसैट फाइनल राउंड में इन परीक्षणों में खरा उतरा। रॉकेट लॉन्च इस प्रदर्शन का मुख्य हिस्सा था, और टीम के स्वदेशी हार्डवेयर ने उड़ान और लैंडिंग के दौरान अपने डिजाइन के अनुसार काम किया।

बड़े अंतरिक्ष काम की ओर एक कदम

छात्रों के लिए दूसरा स्थान अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में बड़े काम की ओर एक कदम है। स्पेस एक्सपो 2026 में इसरो वैज्ञानिकों के सामने प्रस्तुति से टीम को देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम और उसे चलाने वाले वैज्ञानिकों से सीधा जुड़ाव मिला है।

यह प्रतियोगिता छात्रों को जल्दी अंतरिक्ष शोध से जोड़ने के बड़े प्रयास का हिस्सा है। शुरुआती चरण में 69 विश्वविद्यालयों के क्वालिफाई करने से पता चलता है कि देश भर के कितने परिसर अब अपने छोटे उपग्रह और रॉकेट बना रहे हैं।