अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) और अहमदाबाद फैमिली फिजिशियन एसोसिएशन (एएफपीए) ने दीवाली के सप्ताह के लिए अपनी वार्षिक डॉक्टर ऑन कॉल सामाजिक सेवा शुरू की है। यह मुफ्त हेल्पलाइन 7 नवंबर से 13 नवंबर 2026 तक लगातार चलेगी, ताकि त्योहार के दौरान क्लिनिक और ओपीडी बंद रहने पर भी लोग किसी भी समय मेडिकल सलाह ले सकें।

मुफ्त सलाह, दिन-रात

हेल्पलाइन दो स्तर पर काम करती है। वरिष्ठ मेडिकल समन्वयक खुद फोन उठाते हैं, तुरंत मेडिकल सलाह देते हैं और इलाज की शुरुआती जानकारी देते हैं, वह भी पूरी तरह मुफ्त।

अगर किसी को गंभीर लक्षण हों, जिन्हें अस्पताल में भर्ती, सर्जरी या गहन जांच की जरूरत हो, तो समन्वय दल मरीज को ऑन-कॉल विशेषज्ञों और नजदीकी स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ता है।

हेल्पलाइन किन मामलों में मदद करेगी

लोग फूड पॉइजनिंग, पटाखों से हल्की जलन, धुएं से सांस की तकलीफ और दीवाली के दौरान होने वाली अन्य अचानक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए फोन कर सकते हैं।

यह सेवा उस कमी को पूरा करने के लिए है, जो त्योहार पर निजी क्लिनिक बंद होने से पैदा होती है। त्योहार के चरम दिनों में विशेषज्ञ खोजने में कीमती समय लग सकता है, और हेल्पलाइन इसी देरी को कम करने के लिए बनाई गई है।

कॉल सूची में छह डॉक्टर

एसोसिएशनों ने छह प्रमुख डॉक्टर समन्वयकों की सीधी संपर्क सूची जारी की है, जो पूरे सप्ताह फोन संभालेंगे: डॉ. धीरेंद्र मेहता (+91 9898854158), डॉ. अश्विन शाह (+91 9824038816), डॉ. सुनील पटेल (+91 9879225294), डॉ. रमेश पटेल (+91 9426495264), डॉ. ज्योतिंद्र मेहता (+91 9825039653) और डॉ. पार्थ पटेल (+91 9924119778)।

जानलेवा चोट, पटाखों से गंभीर जलन या दिल के दौरे जैसी आपात स्थिति में लोगों को सीधे राज्य की 108 आपात सेवा पर फोन करके एंबुलेंस बुलानी चाहिए, साथ ही हेल्पलाइन से भी संपर्क करना चाहिए।

परिवारों के लिए मन की शांति

एएमए अध्यक्ष डॉ. कल्पिता डेव, एएमए मानद सचिव डॉ. मौलिक सेठ, एएफपीए अध्यक्ष डॉ. रमेश आई. पटेल और एएफपीए मानद सचिव डॉ. मेहुल शेलात ने संयुक्त बयान में कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य देखभाल, मन की पूरी शांति और तुरंत राहत देना है, ताकि अहमदाबाद का हर परिवार सुरक्षित, स्वस्थ और चिंतामुक्त दीवाली मना सके।

यह पहल एक दशक से चली आ रही सामुदायिक परंपरा को आगे बढ़ाती है। दोनों मेडिकल संस्थाएं हर साल मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि त्योहार के सप्ताह में स्वास्थ्य आपात स्थिति में कोई भी निवासी मदद से वंचित न रहे।