आईआईटी गुवाहाटी ने लैम रिसर्च चैलेंज 2026 के तीसरे संस्करण में पहला स्थान हासिल किया। यह उद्योग आधारित सेमीकंडक्टर सिस्टम इंजीनियरिंग प्रतियोगिता थी, जिसमें देश भर के इंजीनियरिंग संस्थानों के 3,000 से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया।

आईआईटी रोपड़ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि एनआईटी कालीकट तीसरे स्थान पर रहा। विजेताओं की घोषणा बेंगलुरु के पीईएस विश्वविद्यालय में आयोजित ग्रैंड फिनाले में की गई। शीर्ष टीमों ने 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि साझा की, और चुने गए प्रतिभागियों को लैम रिसर्च में इंटर्नशिप का मौका भी मिलेगा।

प्रतियोगिता में देश भर के 189 कॉलेजों की 803 टीमों ने भाग लिया। हर टीम में अलग-अलग विषयों के चार छात्र थे, और फाइनलिस्टों में 10 आईआईटी, दो एनआईटी और दो बिट्स परिसरों के छात्र शामिल थे।

तीन महीने की हार्डवेयर और सिस्टम की परीक्षा

क्वालिफिकेशन और हार्डवेयर निर्माण राउंड वाली तीन महीने की चयन प्रक्रिया के बाद 20 कॉलेजों की 25 टीमें फिनाले तक पहुंचीं। फाइनल राउंड में टीमों को जटिल तकनीकी चुनौतियों पर काम करना था, जिनके लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, ऑटोमेशन, डेटा साइंस, प्रोसेस इंजीनियरिंग और एडवांस्ड कंट्रोल को एक साथ जोड़ना था।

चुनौती के तहत टीमों ने एक टेबल-टॉप पेंट फैक्ट्री बनाई जो तीन बेस रंगों को अपने आप मिलाकर पहले ही प्रयास में रेफरेंस सैंपल से मेल खाता तीन लीटर का लक्ष्य रंग तैयार कर सके। रंग मिलाया जा सकता था, हटाया नहीं जा सकता था, इसलिए इस काम में रंगों की मात्रा का सटीक हिसाब और खुराक देना जरूरी था।

दूसरे दिन टीमों ने एक बटन दबाकर पूरी प्रक्रिया को अपने आप चलने लायक बनाया। इसमें पाइपलाइन की सफाई, टैंक को ठंडा करना और रंग की खुराक देना शामिल था, और यह सब बिना किसी मानवीय दखल के हुआ। इस काम में ठीक वही सिस्टम सोच परखी गई जो सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होती है।

अलग-अलग विषयों की विजेता टीम

विजेता आईआईटी गुवाहाटी टीम में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की सुहानी माहेश्वरी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के आकाश कुमार मीणा, श्रुत जैन और इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की कुम्मारी प्रेमजा शामिल थीं। विषयों के इस मेल ने वह बहुविषयक दृष्टिकोण दिखाया जिसे यह चुनौती पुरस्कृत करती है।

आईआईटी रोपड़ की टीम में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग फिजिक्स के छात्र थे, जबकि एनआईटी कालीकट की टीम में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्र थे।

पारंपरिक इंजीनियरिंग प्रतियोगिताओं से अलग, जो एक ही विषय पर केंद्रित होती हैं, इस चुनौती में सिस्टम स्तर की सोच और जटिल सेमीकंडक्टर निर्माण कार्यों के लिए एकीकृत समाधान बनाने की क्षमता पर जोर दिया गया। प्रविष्टियों का मूल्यांकन नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता, सहयोग, समस्या समाधान और दबाव में प्रदर्शन के आधार पर किया गया।

नवाचारियों की अगली पीढ़ी तैयार करना

लैम रिसर्च इंडिया के कॉरपोरेट वाइस प्रेसिडेंट और प्रबंध निदेशक रंगेश राघवन ने कहा कि यह चुनौती छात्रों को ये क्षमताएं बनाने में मदद करने के लिए डिजाइन की गई है, साथ ही उन्हें उद्योग के भविष्य को आकार देने वाली इंजीनियरिंग समस्याओं से परिचित कराती है। उन्होंने कहा कि यह नवाचारियों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने की कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दिखाता है।

विजेता छात्रों के लिए पुरस्कार राशि और लैम रिसर्च में इंटर्नशिप का मौका सेमीकंडक्टर उद्योग में सीधा रास्ता है। प्रतियोगिता के लिए तीसरे संस्करण ने दिखाया कि देश भर में छात्र सिस्टम इंजीनियरिंग में कितनी गहरी रुचि रखते हैं।