पैराग्वे के पूर्व राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को शनिवार को आरोपित किया गया और अदालत ने उन्हें हिरासत में भेज दिया। देश की सीनेट ने शुक्रवार को उन्हें पद से हटा दिया था, और बैंक के पतन के कारण हुए राजनीतिक संकट के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
सीनेट ने सर्वसम्मति से पेना को पद से हटाने के लिए मतदान किया। उस समय सीनेट में उपस्थित 44 सदस्यों ने हटाने के पक्ष में मतदान किया। बैंक के पतन के बाद देश में भारी राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।
शनिवार को पेना को अभियोजकों के सामने पेश किया गया, जहां उनसे लगभग तीन घंटे तक पूछताछ की गई। उनके वकील रिकार्डो प्रेडा ने कहा कि पेना ने आरोपों से इनकार किया है और वे खुद को निर्दोष बताते हैं।
बैंक घोटाले के आरोप
पेना पर विश्वासघात और निजी लाभ के लिए प्रबंधन के आरोप लगे हैं। अभियोजक नैन्सी सैलोमन ने कहा कि प्रत्येक आरोप में 10 साल तक की सजा हो सकती है। न्यायाधीश हंबर्टो ओताज़ु ने पेना को सैन्य सुविधा में हिरासत में रखने का आदेश दिया।
पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो को भी आरोपित किया गया और हिरासत में भेजा गया। कुल 27 बैंक अधिकारियों को आरोपित किया गया है।
यूएनओ बैंक को 3 नवंबर को जब्त कर लिया गया था। बैंक के लगभग 2.9 से 3 मिलियन ग्राहक थे, जो देश की लगभग 6.5 मिलियन की आबादी का लगभग आधा है। केंद्रीय बैंक ने लगभग 1.2 मिलियन बचतकर्ताओं को 160 मिलियन डॉलर का भुगतान किया है।
नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण
पेड्रो अलियाना ने शुक्रवार को राष्ट्रपति पद की शपथ ली और वे अगस्त 2028 तक पद पर रहेंगे। अलियाना पहले उपराष्ट्रपति थे, और सीनेट के फैसले के बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला।
पेना मार्च 2025 तक यूएनओ होल्डिंग के शेयरधारक थे, लेकिन उन्होंने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। उन्होंने गुरुवार को इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन कांग्रेस ने फिर भी हटाने की प्रक्रिया जारी रखी।
बैंक के पतन ने देश की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, क्योंकि बैंक के ग्राहकों की संख्या देश की आबादी का लगभग आधा है। सरकार ने बचतकर्ताओं को भुगतान करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन कई लोग अभी भी अपने पैसे को लेकर चिंतित हैं।
क्या होगा आगे
अदालत ने पेना को हिरासत में भेज दिया है, और उन पर मुकदमा चलेगा। उनके वकील ने कहा है कि वे आरोपों का विरोध करेंगे और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
इस मामले ने पैराग्वे की राजनीति को हिला दिया है। बैंक के पतन और राष्ट्रपति को हटाने के बाद देश में राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नए राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक के संकट से निपटना और जनता का भरोसा बहाल करना है।