नरोडा पुलिस ने 1.85 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय मेफेड्रोन तस्करी रैकेट के कथित सरगना को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान नाइजीरियाई नागरिक चार्ल्स उर्फ फ्रैंक ओफुडिल के रूप में हुई, और उसे तकनीकी जांच के बाद केरल के कोल्लम में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने कहा कि आरोपी बिजनेस वीजा पर भारत में रहकर नेटवर्क चला रहा था। आरोप है कि वह नशे के आदी युवाओं को बिचौलियों के रूप में इस्तेमाल करके नशीले पदार्थ पहुंचाता था, और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए कामकाज संभालता था।
एक जब्ती से खुला मामला
मामला 17 सितंबर 2026 को सामने आया, जब नरोडा पुलिस ने अहमदाबाद के नाना चिलोड़ा सर्कल के पास चामुंडा टायर्स के नजदीक बेंगलुरु निवासी 24 वर्षीय निखिलेश रमेश किशनप्पा को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उससे 1,850 ग्राम मेफेड्रोन बरामद की, जिसकी कीमत 55.50 लाख रुपये थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.85 करोड़ रुपये थी।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि खेप बेंगलुरु के एक प्राप्तकर्ता को पहुंचाई जानी थी। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और 19 सितंबर को मेघालय के मूल निवासी 28 वर्षीय विशाल ऐडोरा सिमलाच को गिरफ्तार किया, जब वह ड्रग्स लेने आया था।
दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि फ्रैंक नाम का एक नाइजीरियाई नागरिक कथित रूप से ड्रग्स की आपूर्ति नियंत्रित कर रहा था और डिलीवरी का समन्वय कर रहा था। वही एक नाम तीन राज्यों में चली तलाश की शुरुआत बना।
तकनीकी निगरानी से केरल तक
दोनों गिरफ्तार डिलीवरी एजेंट फ्रैंक के बारे में नाम के अलावा ज्यादा जानकारी नहीं दे सके। उनके पास कथित रूप से न तो उसकी तस्वीर थी और न ही उसका आवासीय पता।
नरोडा निगरानी पीएसआई वी.आर. चौधरी और उनकी टीम ने इसके बाद नेटवर्क से जुड़े डिजिटल पदचिह्नों और मोबाइल नंबरों की जांच की। तकनीकी विश्लेषण और मानव स्रोतों से मिली जानकारी से जांचकर्ताओं ने कथित सरगना की पहचान 36 वर्षीय चार्ल्स उर्फ फ्रैंक ओफुडिल के रूप में की, जो मूल रूप से नाइजीरिया का रहने वाला है और बेंगलुरु के बनासवाड़ी इलाके में रहता था।
पुलिस ने आखिरकार उसे केरल के कोल्लम में खोज निकाला और गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी से सितंबर की जब्ती और नेटवर्क चलाने वाले कथित व्यक्ति की गिरफ्तारी के बीच का लगभग दो महीने का अंतराल खत्म हुआ।
व्हाट्सऐप पर चलता नेटवर्क
पुलिस जांच में पता चला कि ओफुडिल 2019 में बिजनेस वीजा पर भारत आया था। वह पहले दिल्ली में रहा, फिर 2021 में बेंगलुरु चला गया, जो बाद में उसके कामकाज का आधार बन गया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, वह खुद ड्रग्स की डिलीवरी नहीं संभालता था। आरोप है कि वह युवाओं को, जिनमें से कई खुद नशे के आदी थे, नशीले पदार्थ पहुंचाने और डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करने के लिए भर्ती करता था। आरोप है कि वह विदेशी वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल करके व्हाट्सऐप कॉल के जरिए पूरे नेटवर्क का प्रबंधन करता था, और कूरियरों से सीधा संपर्क कम से कम रखता था।
पुलिस को यह भी पता चला कि 2022 में केरल के कोझिकोड के नादक्कावु पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
ताजा गिरफ्तारी से जांचकर्ताओं को व्यापक नेटवर्क स्थापित करने, अन्य सहयोगियों की पहचान करने और अहमदाबाद में जब्त मेफेड्रोन खेप के पीछे की आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।