गुजरात सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट के सामने स्वीकार किया है कि कई जिलों में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) केंद्र नहीं हैं, जिससे आवारा कुत्तों के बंध्याकरण और टीकाकरण का जिलेवार डेटा अधूरा है। यह स्वीकारोक्ति 28 अक्टूबर की सुनवाई में हुई।

सरकार ने आवारा कुत्तों और मवेशियों पर नियंत्रण के उपायों को लेकर दिए गए निर्देशों के जवाब में हलफनामा दाखिल किया। हाईकोर्ट ने बंध्याकरण और टीकाकरण अभियान, लगाई जा रही वैक्सीन और आवारा कुत्तों की आबादी के प्रबंधन की व्यवस्था का ब्योरा मांगा।

सिर्फ 17 जिलों का डेटा

सरकार ने पिछले छह महीनों के लिए गुजरात के 34 में से सिर्फ 17 जिलों का डेटा दिया था। बाकी 17 जिलों के आंकड़े उसमें उपलब्ध नहीं थे। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद हो रही है जिसमें राज्य अधिकारियों से किए गए उपायों का समय-समय पर डेटा मांगा गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील मेधा जानी ने अदालत को बताया कि नगरपालिका अधिकारियों से कुत्तों के बंध्याकरण और टीकाकरण पर मिली जानकारी अदालत के सामने रखी गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार को सिर्फ बंध्याकरण और टीकाकरण के आंकड़ों तक सीमित न रहकर आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण का तरीका भी बताना चाहिए।

वैक्सीन, निर्माता और साइड इफेक्ट का ब्योरा मांगा

अदालत ने लगाई गई वैक्सीन, उनके निर्माता और उनके प्रतिकूल प्रभाव की आशंका का ब्योरा भी मांगा। खामियों की वजह बताते हुए सरकार ने कहा कि कुछ जिलों में एनिमल बर्थ कंट्रोल केंद्र नहीं हैं, जिससे जिलेवार बंध्याकरण का डेटा तैयार करना मुश्किल हो रहा है।

सरकार ने वडोदरा का उदाहरण देते हुए कहा कि शहर में बंध्याकरण का अच्छा बुनियादी ढांचा है और आसपास के जिलों के कुत्तों को वहां प्रक्रियाओं के लिए ले जाया गया था। नतीजतन कुछ जिलों में शून्य बंध्याकरण दर्ज हुआ, जबकि उन इलाकों के कुत्तों की प्रक्रिया कहीं और हुई थी, सरकार ने समझाया।

शून्य आंकड़ों पर सवाल, बाकी डेटा मांगा

हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या राज्य सुप्रीम कोर्ट के सामने कुछ जिलों के लिए शून्य आंकड़े पेश करना चाहता है, जबकि सरकार के अनुसार बंध्याकरण पूरे राज्य में हुआ था। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गुजरात में 79,150 कार्यालयों और संस्थानों में निरीक्षण किए गए, जिनमें स्कूल, आंगनवाड़ी, अस्पताल, बस डिपो और ग्राम पंचायत कार्यालय शामिल थे।

सरकार के अनुसार नियमित निरीक्षण किए जा रहे थे, टीकाकरण और बंध्याकरण अभियान के बाद आवारा कुत्तों की आबादी नहीं बढ़ी थी, और 114 शिक्षण संस्थानों को कुत्तों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया था। सरकार ने बाकी जानकारी जुटाने के लिए और समय मांगा, और हाईकोर्ट ने अगले हफ्ते अगली सुनवाई तय की।