अहमदाबाद के 37 वर्षीय एक कस्टमर सर्विस अधिकारी ने विदेशी वीजा एजेंट पर यूरोप और दुबई में नौकरी व वर्क परमिट का वादा करके उनसे और उनकी पत्नी से करीब 11.65 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाया है, आनंदनगर पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार। पुलिस ने मामला दर्ज किया है और कथित लेनदेन, दस्तावेजों व शिकायत में नामित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

शिकायतकर्ता नारणपुरा निवासी चिंतनभाई सतीशभाई शाह ने आरोप लगाया है कि देवल हेमंतकुमार जोशी ने 2024 से 2026 के बीच दंपती से पैसे लिए और विदेश में रोजगार दिलाने का वादा किया। हालांकि नॉर्वे का आवेदन वर्क वीजा में नहीं बदला, और शिकायतकर्ता को बाद में टूरिस्ट वीजा पर यूएई भेजा गया, जहां उन्हें कथित तौर पर खुद नौकरी ढूंढने को कहा गया।

स्कूल प्रिंसिपल के जरिए परिचय

शिकायत के अनुसार दंपती का परिचय जोशी से सैटेलाइट के वेदांता इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल जर्नाबेन के जरिए हुआ था, जहां उनकी आठ साल की बेटी पढ़ती थी। जून 2024 में जब जर्नाबेन को पता चला कि शाह विदेश में अवसरों के लिए आईईएलटीएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो उन्होंने कथित तौर पर उन्हें जोशी से मिलवाया और उन्हें वीजा व बीमा एजेंट बताया।

जोशी ने कथित तौर पर यूरोपीय देश के वर्क वीजा के लिए 15 लाख रुपये बताए। दंपती ने पहले पोलैंड पर विचार किया, लेकिन कम वेतन की वजह से उसे ठुकराकर बाद में नॉर्वे में रोजगार तलाशा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दंपती ने शुरुआत में स्कूल में जोशी को 2 लाख रुपये नकद दिए, और जून से दिसंबर 2024 के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म व बैंक ट्रांसफर से जोशी, उनकी पत्नी और उनके कार्यालय ड्रीम ओवरसीज से जुड़े खातों में और भुगतान किए।

धुंधले दस्तावेज और दूतावास का दौरा

जोशी ने कथित तौर पर शाह को 11 नवंबर 2024 का नॉर्वे के आव्रजन निदेशालय का बताया गया दस्तावेज भेजा, फिर नॉर्वे में सैमसंग की ओर से ओस्लो में करीब 31,000 यूरो मासिक वेतन का रोजगार प्रस्ताव बताया गया। हालांकि कथित नियोक्ता का नाम और लोगो धुंधला था, जिससे शाह को उसकी प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। जोशी ने कथित तौर पर कहा कि बाकी भुगतान के बाद पूरा ऑफर लेटर दिया जाएगा।

शाह ने दावा किया कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि वीजा प्रक्रिया छह महीनों में पूरी हो जाएगी, और इस भरोसे पर उन्होंने अपनी मौजूदा नौकरी से इस्तीफा दे दिया, जिसकी नोटिस अवधि 15 जनवरी 2025 को खत्म हुई। जनवरी 2025 में जोशी ने कथित तौर पर आव्रजन रोजगार कागज बताया गया एक और दस्तावेज भेजा, लेकिन कई ब्योरे छिपे थे और शाह का उपनाम गलत लिखा था। मार्च 2025 में उन्हें कथित तौर पर नॉर्वे का कानूनी कागज और निवास प्रमाण बताया गया दस्तावेज मिला, साथ में वीएफएस ग्लोबल का सिफारिश पत्र भी था, और उन्हें पासपोर्ट व कागजों के साथ मुंबई में नॉर्वे के दूतावास जाने को कहा गया।

दुबई यात्रा और रिफंड की मांग

दूतावास दौरे में एक दस्तावेज का बारकोड कथित तौर पर स्कैन नहीं हो पाया। शाह ने आरोप लगाया कि जोशी ने कहा कि वह मितेश नाम के व्यक्ति से बात करेंगे, जिसने बाद में बारकोड नंबर हाथ से दिया। कई महीने वीजा के बिना इंतजार के बाद शाह ने अपना पासपोर्ट वापस मांगा, जो उन्हें सितंबर 2025 में कूरियर से मिला। जोशी ने कथित तौर पर बाद में नॉर्वे आव्रजन शुल्क के लिए और पैसे मांगे, जो शाह ने दावा किया कि उन्होंने सीजी रोड पर नकद दिए, लेकिन वर्क वीजा फिर भी नहीं मिला।

नॉर्वे प्रक्रिया नाकाम होने के बाद जोशी ने कथित तौर पर दुबई में नौकरी दिलाने की पेशकश की, वर्क परमिट और मासिक वेतन का वादा किया। 1 दिसंबर 2025 को जोशी ने कथित तौर पर शाह को दुबई का टूरिस्ट वीजा भेजा। शाह के यह पूछने पर कि वर्क वीजा क्यों नहीं मिला, जोशी ने कथित तौर पर आश्वासन दिया कि वह साथ जाएंगे और पहुंचने के दो दिन में परमिट दिला देंगे। शिकायतकर्ता दिसंबर 2025 के अंत में जोशी के साथ दुबई गए, लेकिन जनवरी 2026 में यूएई पहुंचने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि जोशी होटल में रहे जबकि उन्हें शारजाह में एक श्रम ठेकेदार के आवास पर भेजा गया और 10 दिन में इंटरव्यू देकर खुद नौकरी ढूंढने को कहा गया। शाह ने कहा कि उन्होंने जोशी से सवाल किया, पत्नी की तबीयत का हवाला देकर अहमदाबाद लौटे, और बाद में जायज खर्च काटकर रिफंड मांगा, जिसे जोशी ने कथित तौर पर ठुकरा दिया। शिकायत में कुल 16.65 लाख रुपये के भुगतान का जिक्र है, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि कुछ खर्च व रिफंड के बाद करीब 11.65 लाख रुपये वापस नहीं मिले हैं, और सटीक हिसाब की पुष्टि बाकी है। आनंदनगर पुलिस जांच कर रही है।