AI की वजह से दुनिया पहले ही रैम संकट का सामना कर रही है। इस बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने एक ऐसा बयान दिया है कि पूरी इंटरनेट बिरादरी उनके खिलाफ खड़ी हो गई है। दरअसल सैम ऑल्टमैन ने एक इंटरव्यू में लोगों के पर्सनल कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली रैम को संसाधनों की बर्बादी करार दिया है।

इसके बाद यूजर्स उनके खिलाफ इस कदर भड़क चुके हैं कि OpenAI के AI प्रोडक्ट्स इस्तेमाल न करने की धमकी तक दे रहे हैं। लोग इंटरनेट पर साफ लिख रहे हैं कि सैम ऑल्टमैन नहीं चाहते कि लोग अपने कंप्यूटर पर ओपन-सोर्स AI चलाएं।

ऑल्टमैन ने अपनी बात को सही ठहराने के लिए ग्लोबल रिसोर्स मैनेजमेंट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में मेमोरी चिप्स की किल्लत है, और ऐसे में लोगों के कंप्यूटर में ज्यादा रैम होना और उसका सिर्फ 5 प्रतिशत ही इस्तेमाल में आना साफ तौर पर संसाधनों की बर्बादी है।

उन्होंने बात खत्म करते हुए यहां तक कह दिया कि सप्लाई की समस्या से निपटने के लिए इस मेमोरी को लोगों के कंप्यूटर में नहीं बल्कि क्लाउड और डेटा सेंटर्स में होना चाहिए।

यूजर्स ने बयान को लोकल ओपन-सोर्स AI से जोड़ा

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेट पर लोग ऑल्टमैन के बयान को लोगों के कंप्यूटर पर चलने वाले ओपन सोर्स AI मॉडल से जोड़ कर देख रहे हैं। दरअसल OpenAI जैसी सभी AI कंपनियों का कारोबार क्लाउड डेटा सेंटर्स पर चलने वाले AI मॉडल पर टिका है।

ऐसे में लोग अपने पर्सनल कंप्यूटर में ज्यादा रैम लगाकर अगर लोकल स्तर पर किसी AI को चलाते हैं, तो इन कंपनियों के सब्सक्रिप्शन की जरूरत किसी को नहीं रहेगी। यही वजह है कि लोग ऑल्टमैन को लेकर कह रहे हैं कि उन्हें अपना धंधा खतरे में दिख रहा है।

कंपनियां चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा रैम सिर्फ उनके डेटा सेंटर्स को मिले, न कि आम लोगों के कंप्यूटर या लैपटॉप को। यूजर्स का कहना है कि क्लाउड मेमोरी की वकालत कंपनियों के सब्सक्रिप्शन मॉडल के हित में है।

ऑल्टमैन पर ही मेमोरी संकट पैदा करने का आरोप

ऑल्टमैन के बयान के बाद से वह इंटरनेट यूजर्स के निशाने पर हैं। लोग अब इतना भड़के हुए हैं कि सैम ऑल्टमैन पर ही मेमोरी संकट पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं।

लोग इंटरनेट पर ये तक लिख रहे हैं कि ये टेक दिग्गज चाहते हैं कि लोग अपने पास कुछ भी न रखें और सब कुछ उनसे किराये पर लें। यह विरोध दिखाता है कि मेमोरी कमी की बहस कितनी संवेदनशील हो गई है, और यूजर्स ऑल्टमैन के बयान को कंप्यूटिंग ताकत को लोगों के हाथों से निकालकर कंपनियों के डेटा सेंटर्स में रखने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।