ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने स्मार्टफोन ब्रैंड रियलमी पर आरोप लगाया है कि वह अपनी P4 सीरीज के मॉडलों को ऑनलाइन कम कीमतों पर बेच रही है। यह अंतर 6000 रुपये तक है, और इस वजह से दुकान पर शॉपिंग करने के लिए आने वाले ग्राहक ठगा हुआ महसूस करते हैं और उनका भरोसा कम होता है।
AIMRA के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी ने फ्लिपकार्ट और मेनलाइन यानी दुकानों और स्टोर्स पर बिकने वाले रियलमी P4 सीरीज के मॉडलों के प्राइस भी शेयर किए हैं। AIMRA पूरे देश में 1.5 लाख से अधिक मेनलाइन मोबाइल रिटेलर्स का प्रतिनिधित्व करता है, और इसके चेयरमैन ने ऑनलाइन और मेनलाइन रिटेल के बीच कीमतों में लगातार बने रहने वाले अंतर पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
लख्यानी का कहना है कि हर बार हमें यही भरोसा दिया जाता है कि रियलमी इस समस्या के समाधान के लिए काम कर रही है, हालांकि जमीनी हकीकत कुछ और है। उनका कहना है कि P सीरीज के जरिए रियलमी ऑनलाइन चैनलों को प्राथमिकता दे रही है, वहां कीमतें जानबूझकर कम रखी जाती हैं।
दुकानदार ग्राहक ठगा हुआ महसूस करते हैं
जब मेनलाइन रिटेल यानी दुकान पर आने वाले ग्राहकों को पता चलता है कि P4 सीरीज जैसे मॉडल ऑनलाइन काफी सस्ते मिल रहे हैं, तो उन्हें ठगा हुआ महसूस होता है और दुकानों पर उनका भरोसा तुरंत कम हो जाता है। AIMRA का कहना है कि रियलमी P4 सीरीज के मॉडल ऑनलाइन, विशेषतौर पर फ्लिपकार्ट पर 6000 रुपये तक सस्ते मिल रहे हैं।
AIMRA का कहना है कि वीवो, ओपो और मोटोरोला जैसे ब्रांड सभी चैनलों पर कीमतों को एकजैसा रखते हैं। अगर वो ऐसा कर सकते हैं तो रियलमी को इसे मैनेज करने में इतनी दिक्कत क्यों आ रही है, यह सवाल संगठन ने उठाया है।
अक्टूबर में बिक्री में 60 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट
AIMRA का कहना है कि हाल ही में हुई बैठकों में पूरे भारत के मेनलाइन रिटेलर्स ने एक स्वर में कहा है कि इस अक्टूबर में पिछले साल की तुलना में रियलमी की बिक्री में 60 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई है। AIMRA का कहना है कि यह कंपनी की गलत रणनीतियों का परिणाम है।
AIMRA के अनुसार, रिटेलर्स और ग्राहकों, दोनों का ही भरोसा ब्रांड पर कम हो रहा है। रियलमी के ओपो के साथ विलय की लगातार आ रही अफवाहों ने इस स्थिति को और भी खराब कर दिया है।
ग्राहक इसलिए भी दूर हो रहे हैं, क्योंकि कंपनी के कई एंट्री-लेवल मॉडलों की कीमतें, Vivo जैसे डायरेक्ट कॉम्पीटीटर्स के बराबर या उससे अधिक हैं। ऑनलाइन कीमत के अंतर, गिरती बिक्री और विलय की अफवाहों ने मिलकर रियलमी के सामने भरोसे का संकट खड़ा कर दिया है, ऐसा AIMRA का कहना है।