भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग के इंतजार के बीच चीन अपने दम पर स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहा है। इससे मिलने वाले इंटरनेट का उपयोग आम लोगों के साथ-साथ सैन्य कामकाजों के लिए भी किया जाएगा।

दो नेटवर्क, 28 हजार उपग्रह

चीन ने पिछले लगभग 15 दिनों में दो स्पेस लॉन्च किए हैं और सैटेलाइट इंटरनेट का बड़ा बेड़ा तैयार करने के लिए उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में चीन अपने दम पर आगे बढ़ रहा है और स्टारलिंक से भी बड़ा नेटवर्क बनाने में जुटा है। स्टारलिंक दुनिया की सबसे बड़ी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी है, जिसके पास 11 हजार से अधिक सैटेलाइट्स हैं। चीन की योजना अंतरिक्ष में 28 हजार सैटेलाइट्स लॉन्च करने की है।

गुओवांग, सरकारी कंपनी का नेटवर्क

चीन अपने दो नेटवर्क्स के माध्यम से उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचा रहा है। इनमें पहला है गुओवांग, जिसे चीन सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप चलाता है। यह चीन की सरकारी कंपनी है और अभी तक 222 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज चुकी है। गुओवांग नेटवर्क के जरिए चीन 13 हजार उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाएगा। इसकी पहली लॉन्चिंग दिसंबर 2024 में हुई थी। यह सरकार और सेना को सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ता है।

कियानफान, लोगों के लिए स्टारलिंक जैसी सर्विस

दूसरा नेटवर्क है कियानफान, जिसे शंघाई स्पेससेल टेक्नोलॉजी चलाती है। इसके 248 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाया जा चुका है। कियानफान नेटवर्क की मदद से अंतरिक्ष में 15 हजार उपग्रहों का समूह बनाने की तैयारी है। इससे स्टारलिंक जैसी सर्विस लोगों को दी जाएगी। रिपोर्ट कहती है कि चीन का मकसद अपना खुद का सैटेलाइट इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, और वह ब्रॉडबैंड कवरेज व सैटेलाइट इंटरनेट लॉन्च करने में स्टारलिंक को टक्कर देना चाहता है।

800 से 1200 किमी ऊंचाई, 300 Mbps तक स्पीड

चीन का सैटेलाइट नेटवर्क अंतरिक्ष में 800 से 1200 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैयार किया जा रहा है। स्टारलिंक का सैटेलाइट नेटवर्क साढ़े 500 किलोमीटर से कम की ऊंचाई पर है। जब चीन का सैटेलाइट नेटवर्क तैयार हो जाएगा तो धरती पर अधिकतम 300 Mbps की स्पीड से इंटरनेट चलाया जा सकेगा। इसकी लेटेंसी 40 से 80 मिलीसेकंड होगी, यानी काफी फास्ट इंटरनेट चलेगा।

भारत में अभी भी स्टारलिंक का इंतजार

एक ओर चीन अपनी जरूरतों को स्वदेशी तरीके से पूरा कर रहा है, वहीं भारत में स्टारलिंक का इंतजार है। बीते दिनों स्टारलिंक और जियो के बीच काफी बहस देखने को मिली थी, जब एलन मस्क ने कहा कि कुछ कंपनियों के कारण स्टारलिंक को भारत में सेवाएं शुरू करने नहीं दिया जा रहा है। जियो ऐलान कर चुकी है कि वह सैटेलाइट इंटरनेट लॉन्च करने के लिए अगले साल तक उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजना शुरू करेगी।