पटना में रविवार को की गई खरगे की टिप्पणी पर विवाद सोमवार को और बढ़ गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि वे इस टिप्पणी से स्तब्ध और दुखी हैं, और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह माफी मांगने के बजाय इस कमेंट का बचाव कर रही है।
राजनाथ बोले, टिप्पणी भारत का अपमान है
सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी से वे स्तब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कमेंट सिर्फ किसी व्यक्ति या परिवार का अपमान नहीं, बल्कि पूरे भारत का अपमान है। यह राजनीति की गरिमा पर भी प्रहार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आप अपना विरोध जता सकते हैं, नीतियों पर सवाल उठा सकते हैं और सरकार की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादा की सीमा नहीं लांघनी चाहिए।
माफी के बजाय कांग्रेस बयानबाजी कर रही
राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस यहीं नहीं रुकी, बल्कि अब मल्लिकार्जुन खरगे के शब्दों को सही ठहराने की कोशिश करके लोगों की भावनाओं को और अधिक आहत कर रही है। अपनी गलती मानने और खेद जताने के बजाय, कांग्रेस इस बयान का बचाव करने और इसे सही ठहराने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह टिप्पणी कांग्रेस के किसी सामान्य कार्यकर्ता या युवा नेता ने नहीं की, बल्कि अपने को देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कहने वाली पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की है।
पद की गरिमा और राजनीतिक संस्कृति पर सवाल
सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने आचरण से करोड़ों देशवासियों की भावनाओं को आहत किया है, और अब पार्टी उनके शब्दों को सही ठहराकर फिर से लोगों की भावनाओं को आहत कर रही है। उन्होंने कहा कि खरगे जिस पद पर आसीन हैं, उनसे सार्वजनिक जीवन में अधिक गंभीरता, संयम, मर्यादा और जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में, यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ही इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, तो यह न केवल उनके पद की गरिमा के विपरीत है, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनता हर बात का हिसाब रखती है
सिंह ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन इस तरह का आचरण किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कल तक कांग्रेस के कुछ नेता प्रधानमंत्री की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाते थे और उनकी माताजी के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते थे, और आज वही स्तरहीन राजनीति कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत अपमान में बदल देना और प्रधानमंत्री के परिवार को निशाना बनाना कांग्रेस की हताशा और वैचारिक शून्यता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसी बातों से न तो विचलित होंगे और न ही लोगों की सेवा करने का उनका संकल्प कमजोर पड़ेगा, और लोकतंत्र में जनता हर बात का हिसाब रखती है और समय आने पर जवाब देती है।