रायपुर के बीरगांव नगर निगम क्षेत्र की मतदाता सूची में एक गंभीर गड़बड़ी सामने आई है, जहां पूर्व महापौर अंबिका यदु का जेंडर चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में महिला की जगह पुरुष दर्ज कर दिया गया है। एक पूर्व जनप्रतिनिधि के डेटा में हुई इस चूक ने बूथ लेवल अधिकारियों और सत्यापन अमले की कार्यशैली की पोल खोल दी है और आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध डेटा की सटीकता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोर्टल रिकॉर्ड में क्या दिख रहा है
मतदाता सेवा पोर्टल पर अंबिका यदु का नाम और उनके रिश्तेदार का नाम समेत निजी विवरण सही क्रम में दिख रहा है, लेकिन उनकी प्रविष्टि में जेंडर वाला कॉलम पुरुष दर्ज है। इस चूक को और गंभीर बात यह बनाती है कि यह हाल ही में पूरी हुई SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद भी रिकॉर्ड में बनी रही, जिसके तहत घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया गया था।
अन्य प्रविष्टियों में भी त्रुटियां
यह समस्या किसी एक प्रविष्टि तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नामों और तस्वीरों के मिलान में भी त्रुटियां सामने आ रही हैं, जिससे चुनाव आयोग के पोर्टल के डेटा की सुरक्षा और शुद्धता को लेकर उलझन बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि जब एक जानी-पहचानी हस्ती के साथ ऐसी प्रशासनिक चूक हो सकती है, तो आम नागरिकों की प्रविष्टियों में किस स्तर की गड़बड़ियां होंगी, यह भी जांच का विषय है।
पूरी सूची के नए सिरे से सत्यापन की मांग
घर-घर सत्यापन का दावा करने वाले SIR अभियान के बाद भी इतनी बड़ी चूक बने रहने से प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या मैदानी अमले ने नियमों के तहत जमीनी स्तर पर नाम और फोटो का वास्तविक सत्यापन किया ही नहीं, और पुनरीक्षण के बावजूद पोर्टल पर ऐसी भारी त्रुटियां कैसे रह गईं। अब मांग उठ रही है कि पूरी मतदाता सूची का नए सिरे से भौतिक सत्यापन कराया जाए।