कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारत के राजनीतिक इतिहास का एक निजी अध्याय खोला है। उन्होंने बताया है कि उनके पति राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के वह खिलाफ थीं। यह खुलासा उनकी आत्मकथा बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव के प्रकाशन से पहले साझा किए गए एक छोटे वीडियो में सामने आया है।
मंगलवार को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में सोनिया गांधी अपनी कहानी खुद बताने के फैसले के बारे में बात करती हैं। उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा गया, तो वह इसके पूरी तरह खिलाफ थीं। इस छोटी झलक में उन्होंने विस्तार से यह नहीं बताया कि उस समय उनकी सबसे बड़ी चिंता क्या थी।
यह जानकारी, उनके अनुसार, किताब पढ़ने पर ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। यह झलक जानबूझकर संक्षिप्त रखी गई है, जिसमें भारत के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक के भीतर की निजी असहमति की झलक मिलती है, लेकिन पूरा किस्सा सामने नहीं आता।
सोनिया गांधी की आत्मकथा में इटली में उनका बचपन, भारत आना, राजीव गांधी से शादी और गांधी परिवार के साथ उनका जीवन शामिल है। किताब का शीर्षक प्रेम, परिवार, रिश्तों और अपनेपन से जुड़ी उनकी यात्रा की ओर इशारा करता है, और राजीव वाला प्रकरण इसमें राजनीतिक तर्क के रूप में नहीं, बल्कि निजी कहानी के हिस्से के रूप में पेश किया गया है।
राजीव गांधी ने कब संभाला था पद
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभाला था। उस समय देश एक बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा था, और यह जिम्मेदारी उन्हें राष्ट्रीय सदमे और शोक के क्षण में मिली थी।
राजीव गांधी इससे पहले सक्रिय राजनीति में आ चुके थे, लेकिन प्रधानमंत्री का पद उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ था। उन्होंने बड़े बदलावों के दौर में देश का नेतृत्व किया, और बाद में 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।
सोनिया गांधी का खुलासा इस सार्वजनिक इतिहास में एक निजी पहलू जोड़ता है। इससे पता चलता है कि जो फैसला अब राष्ट्रीय रिकॉर्ड का हिस्सा है, वह परिवार के भीतर असहमति और चिंता का विषय था। जैसा उन्होंने बताया है, उनका विरोध झिझक भरा नहीं, बल्कि पूरा था।
अपनी कहानी खुद लिखने का फैसला क्यों किया
वीडियो में सोनिया गांधी ने आत्मकथा लिखने के अपने फैसले की वजह बताई है। उन्होंने कहा कि दशकों तक दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं, और जो कुछ लिखा गया, वह या तो सही नहीं था या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। अब वह अपने अनुभवों को अपने शब्दों में सामने रखना चाहती हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि किताब के प्रकाशित होने के बाद बहस और चर्चा हो सकती है। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब यह किताब प्रकाशित होगी, तो कुछ न कुछ तमाशा होना तय है, क्योंकि दशकों तक दूसरे लोग उनकी कहानी बताते रहे हैं, और अब बारी उनकी है।
यह बात इसलिए अहम है, क्योंकि यह आत्मकथा को अपनी कहानी वापस लेने के प्रयास के रूप में पेश करती है। सोनिया गांधी दशकों से सार्वजनिक जीवन में हैं, अक्सर टिप्पणियों का विषय रही हैं, और यह किताब उनके अनुभवों को उनकी यादों के अनुसार सामने रखने का प्रयास है।
आत्मकथा कब प्रकाशित होगी
सोनिया गांधी ने 22 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट शुरू करते हुए किताब की पहली झलक साझा की थी। अब 10 नवंबर को इसके प्रकाशित होने के साथ पाठकों को उनके जीवन और राजनीतिक सफर के उन पहलुओं को जानने का मौका मिलेगा, जिन्हें वह खुद सामने रखना चाहती हैं।
प्रकाशन की तारीख ही इस झलक का समय तय करती है। दो हफ्ते से भी कम समय बचा है, और इस छोटे वीडियो ने पहले ही किताब और खासकर राजीव वाले प्रकरण की ओर ध्यान खींच लिया है, जो इसके सबसे चर्चित हिस्सों में से एक रहने की संभावना है।
पाठकों के लिए यह आत्मकथा आधिकारिक इतिहास नहीं, बल्कि निजी विवरण होगी। इसकी अहमियत इस बात में होगी कि सोनिया गांधी खुद उन निजी क्षणों के बारे में क्या बताती हैं, जिन्होंने सार्वजनिक घटनाओं को आकार दिया, और वह उन फैसलों को कैसे समझाती हैं, जिन्हें लंबे समय से सिर्फ बाहर से देखा गया है।