केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें नमन किया और देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं दीं। शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में रन फॉर यूनिटी को झंडी दिखाकर रवाना किया।

कार्यक्रम में शाह ने देश के एकीकरण में पटेल के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। पटेल ने सिर्फ देश का इतिहास नहीं बदला, बल्कि देश के भूगोल की संरचना भी बदली, अनेक राज्यों और रजवाड़ों को एक माला में पिरोकर अखंड भारत का नक्शा दिया।

1218 दिन का वह काम जिसे असंभव माना गया

शाह ने याद किया कि आजादी के समय दुनिया भर के राजनीतिक पंडित कहते थे कि भारत बिखर जाएगा। फिर भी आजादी के बाद के 1218 दिन में पटेल ने वह कर दिखाया जिसे हर कोई असंभव मानता था, ऐसा काम जिसे कई नेता मिलकर भी जीवन भर में पूरा न कर पाएं। पटेल की कल्पना और निर्माण का भारत आज दुनिया के सामने गर्व के साथ खड़ा है।

यह विलय अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती था। आजादी के समय देश में 560 से अधिक रियासतें थीं और उन्हें भारतीय संघ में लाने का काम पटेल ने तत्कालीन रियासत विभाग के सचिव वीपी मेनन के साथ मिलकर किया। विलय-पत्र यानी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन इस प्रक्रिया का अहम माध्यम बना।

2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

शाह ने नशे के खिलाफ लड़ाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस साल 31 मार्च तक देश नक्सलवाद से मुक्त होकर नशामुक्त देश की दिशा में आगे बढ़ गया है। पटेल की जयंती पर उन्होंने पूरे देश के लोगों से 31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के लिए अपील की और इसे प्रधानमंत्री के विकसित भारत के सपने का पहला चरण बताया।

पटेल को लौह पुरुष क्यों कहा जाता है

पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। 1928 में बारडोली सत्याग्रह का नेतृत्व करने के बाद उन्हें सरदार की उपाधि मिली। वह स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने और एकीकरण में उनकी भूमिका के कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। उनका निधन 15 दिसंबर 1950 को हुआ।

शाह ने इस मौके पर कांग्रेस पर निशाना भी साधा और कहा कि पार्टी ने कई वर्षों तक पटेल को उनके काम के अनुरूप सम्मान नहीं दिया और उन्हें भुलाने का काम किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर पटेल के व्यक्तित्व को पूरे देश के सामने स्थापित किया।