भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने देश की अपनी नेविगेशन प्रणाली में एक अहम कड़ी जोड़ दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है, जिससे स्वदेशी NavIC प्रणाली फिर उस न्यूनतम ताकत तक पहुंच गई है जो उसे अपने दम पर पोजिशनिंग सेवा देने के लिए चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह प्रक्षेपण NavIC को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और बेहतर क्षमताओं वाला यह सैटेलाइट आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ देश के लोगों को नेविगेशन सेवाएं देने में मदद करेगा।
NavIC सिर्फ तीन सैटेलाइट पर चल रहा था
NavIC कुछ समय से सैटेलाइट की कमी से जूझ रहा था। जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार सिर्फ तीन सैटेलाइट, IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01, पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं दे रहे थे। बुनियादी पोजिशनिंग सेवा के लिए कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइट चाहिए, इसलिए NavIC स्वतंत्र रूप से GPS जैसी पोजिशनिंग सेवा नहीं दे पा रहा था, हालांकि उसकी टाइमिंग सेवा काम कर रही थी।
NVS-03 उन तीन सैटेलाइट के साथ जुड़कर प्रणाली को न्यूनतम परिचालन क्षमता तक पहुंचाता है। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने मिशन की सफलता के बाद कहा कि इससे NavIC की पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं मजबूत हुई हैं।
NVS-02 की नाकामी से जुड़ा है यह प्रक्षेपण
इस प्रक्षेपण तक पहुंचने के रास्ते में एक झटका भी आया था। 29 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया NVS-02 अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। जांच में पता चला कि सैटेलाइट की ऑक्सिडाइजर लाइन में लगे पायरो वाल्व तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल नहीं पहुंचा, जिससे उसका प्रोपल्शन सिस्टम काम नहीं कर सका और उसे तय कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। NVS-03 अब उसी कमी को पूरा करता है।
सेना के लिए अपना GPS क्यों जरूरी है
NavIC का मजबूत होना सिर्फ अंतरिक्ष तकनीक की उपलब्धि नहीं है। आधुनिक युद्ध में मिसाइलों, सटीक निशाने वाले हथियारों, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को सटीक लोकेशन और समय की जानकारी चाहिए होती है, जो पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सिग्नल से मिलती है। अमेरिका का GPS और रूस का GLONASS दुनिया की प्रमुख प्रणालियां हैं और भारतीय बल जरूरत के अनुसार कई प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन किसी दूसरे देश की प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर रहना रणनीतिक जोखिम पैदा करता है, क्योंकि युद्ध या तनाव के समय सेवाओं पर रोक, सीमित पहुंच या सिग्नल की गुणवत्ता में बदलाव का खतरा रहता है। NavIC भारत को अपना स्वतंत्र विकल्प देता है।
आम लोगों को क्या फायदा होगा
इस मजबूती का फायदा सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। ISRO अध्यक्ष ने NavIC को वन नेशन, वन टाइम परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बताया है। रेलवे ट्रेनों की रियल टाइम लोकेशन ट्रैक कर सकेगा, सड़क परिवहन में वाहनों की ट्रैकिंग और नेविगेशन बेहतर हो सकता है, समुद्री परिवहन में जहाजों की लोकेशन और आवागमन की निगरानी आसान होगी और आपदा प्रबंधन में लोकेशन आधारित सेवाएं मजबूत होंगी।
NVS-03 की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी रुबिडियम परमाणु घड़ी है, जिसके साथ कुछ विदेशी परमाणु घड़ियां भी लगाई गई हैं। नेविगेशन में परमाणु घड़ी इसलिए अहम है, क्योंकि रिसीवर अपनी लोकेशन इसी आधार पर निकालता है कि सैटेलाइट का सिग्नल उस तक पहुंचने में कितना समय लगा, और इसके लिए बेहद सटीक समय चाहिए।