राष्ट्रीय राजधानी के कई स्कूलों को शुक्रवार को बम की धमकी मिली, जिसके बाद दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या आपत्तिजनक सबूत नहीं मिला और धमकियों के स्रोत तथा उनकी विश्वसनीयता का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, रोहिणी स्थित वेंकटेश्वर पब्लिक स्कूल और मयूर विहार स्थित सलवन पब्लिक स्कूल उन संस्थानों में शामिल थे, जिन्हें धमकियां मिलीं। दमकल विभाग को दोनों स्कूलों के संबंध में सुबह करीब 9.37 बजे और 9.57 बजे कॉल मिलीं।

सलवन पब्लिक स्कूल को मिली धमकी में क्या कहा गया?

पुलिस ने बताया कि मयूर विहार के सलवन पब्लिक स्कूल को मिली धमकी में 30 अक्टूबर को संभावित बम हमले का जिक्र था। अलर्ट के बाद पुलिस टीमें और दमकल कर्मी स्कूलों में पहुंचे और सुरक्षा जांच शुरू की, एहतियात के तौर पर परिसरों की पूरी तलाशी ली गई।

शुरुआती तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। धमकियों के स्रोत और विश्वसनीयता को स्थापित करने के लिए फिलहाल जांच चल रही है।

नोएडा के स्कूलों को ऐसी धमकियां कब मिली थीं?

इससे पहले 12 अक्टूबर को दिल्ली से सटे नोएडा के कई स्कूलों को ईमेल के जरिए बम की धमकियां मिली थीं, जिससे दहशत फैली और सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए थे। इन संस्थानों में एपीजे स्कूल, स्टेप बाय स्टेप स्कूल और सेक्टर 16 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) GBN शामिल थे।

उन धमकियों के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सतर्क किया गया और तुरंत सुरक्षा जांच शुरू हुई। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड, एंटी सैबोटाज टीमें और दमकल कर्मी परिसरों की तलाशी के लिए तैनात किए गए और गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने कहा कि थाना कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय किया। उन तलाशियों में भी कोई संदिग्ध वस्तु या सामग्री नहीं मिली थी।

बार बार की धमकियों से अभिभावक और पुलिस चिंतित क्यों हैं?

दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्कूलों को निशाना बनाकर मिल रही बार बार की बम धमकियों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, स्कूल प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसी धमकियां आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करवाती हैं और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां बाधित करती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि हर धमकी को पूरी तलाशी पूरी होने तक असली मानकर चलना पड़ता है, इसलिए हर ऐसे अलर्ट के बाद संदेशों के स्रोत का पता लगाने और छात्रों व स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच जारी रहती है।