अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच ने स्कूलों, अदालतों, मेयर कार्यालय और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम को भेजी गई बम धमकियों की श्रृंखला में पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े संदिग्ध तार उजागर किए हैं। शहर में कई जगहों का नाम लेकर धमकी भरे ईमेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
शुरुआती जांच के अनुसार समझौता किए गए जीमेल अकाउंट क्रिप्टोकरेंसी से टेलीग्राम और व्हाट्सऐप नेटवर्क के जरिए खरीदे गए थे और फिर धमकियां भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए। यह जांच पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई।
पहले ईमेल में 16 जगहों का नाम
धमकियों के पहले सेट में दो जीमेल अकाउंट से फर्जी नामों से ईमेल भेजे गए थे। जांचकर्ताओं के अनुसार उन संदेशों में खास समय का जिक्र था और खालिस्तानी संबंधी सामग्री भी थी।
धमकियों में करीब 16 जगहों का नाम था, जिनमें 10 स्कूल, मेयर कार्यालय, गुजरात हाईकोर्ट, सोला का कोर्ट परिसर, मेट्रो कोर्ट, अहमदाबाद का जिला एवं सत्र न्यायालय और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे। साइबर क्राइम टीमों ने स्कूलों और कोर्ट परिसरों का दौरा किया और तकनीकी जांच के लिए ईमेल हेडर हासिल किए।
अकाउंट का तार बांग्लादेश और रावलपिंडी से जुड़ा
शुरुआती विश्लेषण से पता चला कि ईमेल अकाउंट बांग्लादेश से जुड़े थे और उन्हें पहले बनाया या हासिल किया गया था और बांग्लादेश व पाकिस्तान के रावलपिंडी से चलाया जा रहा था। जांचकर्ता अकाउंट के पीछे की पूरी श्रृंखला की पुष्टि अभी कर रहे हैं।
27 अक्टूबर को एक और धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें 19 जगहों का नाम था, जिनमें 14 स्कूल, दानापीठ का मेयर कार्यालय, गुजरात हाईकोर्ट, मेट्रो कोर्ट, घीकांता कोर्ट परिसर, सिटी सिविल कोर्ट और नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम शामिल थे। साइबर क्राइम ब्रांच ने दूसरा मामला दर्ज किया और आगे तकनीकी जानकारी मांगी।
दूसरे ईमेल का तार रंगपुर और लाहौर से जुड़ा
शुरुआती नतीजों के अनुसार दूसरे ईमेल का कनेक्शन बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से जुड़ा। खालिस्तानी संगठन के नाम पर पहले दी गई धमकियों की अलग जांच में पुलिस पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार एक आरोपी तक पहुंची।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने हैक किए गए जीमेल अकाउंट बांग्लादेश के एक व्यक्ति को बेचे थे, जिसने बाद में उन्हें पाकिस्तान के एक व्यक्ति को बेच दिया, और भुगतान कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में किया गया। जांचकर्ताओं को संदेह है कि समझौता किए गए अकाउंट टेलीग्राम और व्हाट्सऐप नेटवर्क से खरीदकर भारत में डर फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं, खासकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के आसपास। जांच जारी है, और कथित अंतरराष्ट्रीय तार की पुष्टि अभी बाकी है।