भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग की निगरानी टीम ने चूजे के शारीरिक लक्षणों से उसके नर होने की पुष्टि की। अंडा राजस्थान से 770 किलोमीटर दूर से लाया गया था।

नर होने की पुष्टि कैसे हुई

निगरानी टीम और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने चूजे के शारीरिक लक्षणों का अध्ययन कर उसके नर होने की पुष्टि की। सिर पर राखोड़ी पंखों का अभाव, गहरा रंग, अपेक्षाकृत मोटी गर्दन और पैरों की विशेष बनावट नर घोराड के लक्षण हैं, जो अब साफ दिख रहे हैं।

चूजा 26 मार्च को कच्छ के अबडासा स्थित नलिया अभयारण्य में जन्मा था, और वन विभाग की क्षेत्रीय टीम मां के साथ उसकी 24 घंटे निगरानी कर रही है।

770 किलोमीटर की अंडे की यात्रा

जंपस्टार्ट अप्रोच के तहत राजस्थान के जैसलमेर (सैम) स्थित ब्रीडिंग सेंटर से एक उर्वर अंडा विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखकर सड़क मार्ग से 770 किलोमीटर दूर लाया गया, जिसमें दो राज्यों के वन विभागों का 19 घंटे का अभियान चला। 22 मार्च को कच्छ की मादा के घोंसले से अनुर्वर अंडा हटाकर यह उर्वर अंडा रखा गया, जिसे मादा ने सेकर 26 मार्च को स्वस्थ चूजे को जन्म दिया।

इसी पद्धति से मई में दूसरा चूजा भी जन्मा, जिससे साबित हुआ कि यह तरीका दोहराया जा सकता है।

एक नर इतना अहम क्यों

2020 से अभयारण्य का इकलौता नर घोराड गायब था, इसलिए मादाएं अंडे तो देती थीं, पर नर न होने से वे अनुर्वर रह जाते थे। इस समय नलिया अभयारण्य में करीब तीन मादा घोराड स्वतंत्र विचरण कर रही हैं, और नए नर के आने से जंगल में प्राकृतिक प्रजनन का रास्ता खुल गया है।

संरक्षण की लंबी राह

यह प्रयास 2011 के विजन और 2016 में शुरू हुए प्रोजेक्ट GIB से जुड़ा है, जिसके तहत राजस्थान में घोराड की संख्या बढ़कर 73 हो गई है और अब उसका लाभ गुजरात को मिल रहा है। केंद्रीय वन-पर्यावरण मंत्री और राज्य के वन मंत्री ने इस संयुक्त प्रयास को लुप्त होती प्रजाति के संरक्षण के लिए निर्णायक कदम बताया है।