कई छोटे कारोबार दुकान, लोन या निवेशक से शुरू होते हैं। यह कारोबार कार, कुछ बोतलों और दो लोगों से शुरू हुआ, जो दिन की नौकरी खत्म करके रात में दूसरी पारी शुरू करते थे। कपल ने अपनी नौकरियां जारी रखीं, शाम को बेचना शुरू किया और मांग को ही अगला कदम तय करने दिया। यही धीमी और कम लागत वाली शुरुआत इस कहानी को पहली बार कारोबार शुरू करने वालों के लिए उपयोगी बनाती है: बढ़त बड़े शुरुआती बजट से नहीं, बल्कि लौटकर आने वाले खरीदारों से आई।

दर्शन सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और श्रुति MBA हैं। जुलाई 2025 में दोस्तों की सलाह पर उन्होंने सिर्फ 2000 से 3000 रुपये लगाकर वेंचर की शुरुआत की। पहले ही दिन घर में बने कोल्ड कोको की 14 बोतलें 40 मिनट के अंदर बिक गईं। इस प्रतिक्रिया ने उन्हें नियमित रूप से बेचने के लिए प्रेरित किया। दिनभर वे अपनी-अपनी नौकरियां करते। दर्शन के ऑफिस से लौटते ही दोनों रात 9 बजे से 12 बजे तक अपनी कार की डिग्गी से फ्रेश होममेड कोल्ड कोको और कोल्ड कॉफी बेचते। अहमदाबाद के गोटा इलाके को उन्होंने अपने बिजनेस के लिए चुना।

सोशल मीडिया और माउथ-पब्लिसिटी से जैसे-जैसे डिमांड बढ़ी, श्रुति ने अपनी अकाउंटिंग फर्म की नौकरी छोड़ दी। वह पूरा समय बिजनेस को देने लगीं। उनका डेली रूटीन बेहद अनुशासित है। सुबह श्रुति बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के अमूल गोल्ड मिल्क से शुद्ध ड्रिंक्स तैयार करती हैं। 150 बोतलें भरकर फ्रिज में रख देती हैं। रात में दर्शन के दफ्तर से लौटने पर दोनों साथ कार से बिक्री के लिए निकलते हैं।

14 बोतल से रोज 150 बोतल तक

शुरुआत में यह स्टार्टअप हर दिन 14 बोतलें बेचता था। आज यह औसतन 150 बोतलें रोजाना बेच रहा है। रोज की बिक्री करीब 20000 रुपये है। मासिक रेवेन्यू करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इससे डेढ़ साल में कुल कमाई 36 लाख रुपये के पार हो गई है। इसमें अकेले नवरात्र के 9 दिनों में 7500 बोतलें बिकी थीं। इसके अलावा नए उद्यमियों की डिमांड देखकर कपल ने अपना रेडी-टू-यूज प्रीमिक्स पाउडर भी बेचना शुरू किया है। इसकी अब तक 2000 किलो से ज्यादा बिक्री हो चुकी है।

बिना बाहरी फंडिंग के बढ़ता कारोबार

बिना किसी बाहरी फंडिंग के पति-पत्नी का वेंचर अपने ही मुनाफे से दौड़ रहा है। इससे कीमत, प्रोडक्ट और गति पर कपल का पूरा नियंत्रण बना रहा। अब अगला कदम कार की डिग्गी से आगे बढ़ना है। सीमित स्थान और इंफ्रास्ट्रक्चर अब रुकावट बन रहे हैं, और दर्शन और श्रुति अहमदाबाद में जल्द ही अपना पहला स्टोर खोलने वाले हैं। उनका टारगेट अगले दो सालों में 4 से 5 नए आउटलेट खोलना है।

आगे की बड़ी योजना

लंबी अवधि का लक्ष्य एक मजबूत, टिकाऊ और फ्रेंचाइजी-बेस्ड नेशनल ब्रांड बनाना है। यह महत्वाकांक्षा इस बात की परीक्षा लेगी कि होममेड तैयारी और रात की स्ट्रीट सेलिंग पर बना प्रोडक्ट बड़े स्टोर फॉर्मेट में भी अपनी क्वालिटी बनाए रख पाता है या नहीं। फिलहाल आंकड़े साफ रास्ता दिखाते हैं: छोटी शुरुआत, अनुशासित डेली रूटीन और ऐसा प्रोडक्ट जिसके लिए खरीदार लौटकर आए। स्टोर से पता चलेगा कि यही मॉडल बड़े पैमाने पर भी काम करता है या नहीं।