विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिबंधों और प्रमुख पारगमन अवरोधों के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले कीमतों को बंधक बनाने की सोची-समझी रणनीति हैं। शुक्रवार को अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया उत्पादन की कमी के कारण नहीं, बल्कि अनिश्चितता, आपूर्ति व्यवधान, वहनीयता से बाहर की लागतों और पहुंच की कठिनाइयों के कारण ऊर्जा संकट का सामना कर रही है।

उनकी टिप्पणियां ईरानी तेल की बिक्री पर अमेरिकी प्रतिबंधों, पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के फैसले के बीच आई हैं। यह बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुलाई थी। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला है कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले कीमतों को बंधक बनाने के लिए किए जा रहे हैं और बैठक में कहा कि G20 को ऊर्जा बाजारों को खुला और अनुमानित बनाए रखने के लिए समझ और नेतृत्व दोनों दिखाने चाहिए।

जयशंकर ने तर्क दिया कि ऊर्जा बाजार बाधाओं, प्रतिबंधों और अवरोधों के जरिए तेजी से विकृत हो रहे हैं, जिनका दायरा और असर बढ़ रहा है, और निम्न आय वाले देशों की कठिनाइयों पर बहुत कम ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल और गैस के बीच सुविधाजनक भेद किए जा रहे हैं और चुनिंदा छूट अपने आप में बहुत कुछ कहती हैं।

ऊर्जा पर G20 से भारत क्या चाहता है

मंत्री ने कहा कि ऐसे उपायों के व्यापक असर और वैश्वीकृत बाजार में देशों की परस्पर निर्भरता को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि भारत को स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों के लिए विश्वसनीय और अनुमानित LPG आपूर्ति चाहिए, यह एक ऐसा बिंदु है जो ऊर्जा व्यापार को विकासशील देशों में घरेलू कल्याण से सीधे जोड़ता है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन खोज से लेकर पुनर्चक्रण तक पूरी प्रक्रिया को कवर करता है और भारत ने G20 महत्वपूर्ण खनिज परिपत्रता पहल का प्रस्ताव दिया है। मंत्री ने कहा कि G20 को वित्त तक पहुंच बढ़ानी चाहिए और ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन में प्रगति का समर्थन करना चाहिए।

खुले और अनुमानित बाजारों का आह्वान

कुल मिलाकर जयशंकर की टिप्पणियां तीन जुड़ी जरूरतों पर केंद्रित थीं: खुले और अनुमानित ऊर्जा बाजार, विकासशील देशों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति और वित्त, महत्वपूर्ण खनिजों व उभरती ऊर्जा प्रौद्योगिकियों पर अधिक G20 सहयोग। उनका संदेश था कि ऊर्जा सुरक्षा को एक संकीर्ण वाणिज्यिक प्रश्न नहीं माना जा सकता, जब प्रतिबंध और अवरोध यह तय कर रहे हों कि कौन, किस कीमत पर और कितनी निश्चितता के साथ खरीद सकता है।

भारत के लिए दांव व्यावहारिक होने के साथ-साथ कूटनीतिक भी हैं। एक बड़े ऊर्जा आयातक के रूप में वह हर आपूर्ति झटके और मूल्य वृद्धि के संपर्क में है और G20 में उसका तर्क था कि व्यवस्था को ऐसे नियम और नेतृत्व चाहिए, जो सभी के लिए पहुंच की रक्षा करें, न कि ऐसे उपाय जो निम्न आय वाले देशों को अन्य देशों के विवादों की लागत उठाने के लिए छोड़ दें।