त्योहारों का मौसम ऑनलाइन खरीदारी के साथ ऑनलाइन ठगी का भी सबसे बड़ा समय होता है। साइबर सुरक्षा कंपनी Kaspersky ने त्योहारी खरीदारी के दौर से जुड़े निष्कर्ष साझा किए हैं, जिनसे पता चलता है कि ठग फर्जी वेबसाइट, फेक डिलीवरी मैसेज और छूट के जाल से खरीदारों को निशाना बनाते हैं, साथ ही कंपनी ने सुरक्षित रहने के व्यावहारिक उपाय भी बताए हैं।

जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच Kaspersky ने ऑनलाइन स्टोर, बैंक और पेमेंट सिस्टम के नाम पर 64 लाख से अधिक फिशिंग कोशिशें रोकीं, जिनमें से लगभग आधी सीधे ऑनलाइन खरीदारों को निशाना बना रही थीं। संदेश साफ है, खरीदारी का मौसम जितना व्यस्त होता है, ठग अपने जाल को उतनी ही सफाई से सजाते हैं।

असली ब्रांड की नकल वाली फर्जी वेबसाइट

सबसे आम जाल वह फर्जी वेबसाइट है जो किसी असली ब्रांड या स्टोर की हूबहू नकल करती है। हाल के उदाहरणों में तथाकथित iPhone Duo बेचने वाली फर्जी साइट शामिल हैं, जो 25 फीसदी छूट, काउंटडाउन टाइमर और व्हाट्सऐप चैट ऑफर से जल्दबाजी पैदा करती हैं। बड़ी कंपनियों और स्टोर के नाम पर बनी दूसरी फर्जी साइट प्री-सेल छूट का लालच देती हैं और शुरुआत में सिर्फ नाम, पता और संपर्क विवरण मांगती हैं, साथ में मैनेजर के कॉलबैक का वादा करती हैं। असली ठगी बाद में शुरू होती है, जब उन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल बड़े वित्तीय फ्रॉड के लिए किया जाता है। 2025 में महाकुंभ के नाम पर सामान बेचने वाली फर्जी साइट ने लोगों से पैसे लिए और कुछ भी डिलीवर नहीं किया।

फेक डिलीवरी मैसेज का जाल

एक और आम चाल वह मैसेज है जिसमें दावा किया जाता है कि पार्सल डिलीवर नहीं हो पाया है या छोटी सी री-डिलीवरी फीस मांगी जाती है। यह मैसेज यूजर को एक लिंक पर धकेलता है, जहां कार्ड डिटेल, पासवर्ड या वन-टाइम पासवर्ड मांगे जाते हैं। Kaspersky की चेतावनी है कि पैसे पाने के लिए कभी UPI पिन डालने की जरूरत नहीं पड़ती और डिलीवरी मैसेज में OTP या पासवर्ड की मांग हमेशा खतरे का संकेत है।

ऑनलाइन शॉपिंग में सुरक्षित रहने के उपाय

सबसे सुरक्षित आदत यही है कि सिर्फ आधिकारिक ऐप और भरोसेमंद वेबसाइट से ही खरीदारी करें और भुगतान से पहले वेब एड्रेस ध्यान से जांचें। अवास्तविक छूट और काउंटडाउन टाइमर को सौदे की बजाय चेतावनी समझें और संदिग्ध मैसेज के लिंक पर कभी क्लिक न करें। ऑर्डर और डिलीवरी की स्थिति सिर्फ रिटेलर या कूरियर के आधिकारिक ऐप में ही जांचें, कभी मैसेज के लिंक से नहीं। कभी री-डिलीवरी फीस न दें और किसी को भी OTP या पासवर्ड न बताएं। ऑनलाइन खरीदारी के लिए वर्चुअल कार्ड का इस्तेमाल और बैंक स्टेटमेंट की नियमित जांच से भी नुकसान सीमित हो सकता है, अगर जानकारी लीक भी हो जाए।