वेलिंगटन में भारत को तेज शुरुआत दिलाने के बाद युवा बल्लेबाज के साथ अपने रिश्ते पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए भारतीय ओपनर ने साफ किया कि ड्रेसिंग रूम युवा खिलाड़ी के आगे बढ़ने में अपनी भूमिका को कैसे देखता है।

वेलिंगटन में रिकॉर्ड ओपनिंग साझेदारी

तीसरे टी20 में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ने भारत के लिए ओपनिंग की। सीरीज के पहले दो मैचों में संजू सैमसन ने ओपनिंग की थी, जबकि नंबर तीन पर बल्लेबाजी करके नाकाम रहे वैभव को वेलिंगटन में ओपनिंग के लिए भेजा गया।

यह बदलाव तुरंत काम कर गया। दोनों ने पावरप्ले में 118 रन बनाए और सिर्फ 43 गेंदों पर 133 रनों की साझेदारी की। अभिषेक ने 38 गेंदों पर 113 रन बनाए, जबकि वैभव ने 19 गेंदों पर 45 रन बनाए।

मैच के बाद मेंटर वाला सवाल

मैच के बाद पूर्व स्पिनर मुरली कार्तिक ने अभिषेक से वैभव के बारे में सवाल किया। कार्तिक ने कहा कि युवराज सिंह अभिषेक के मेंटर हैं, और सोशल मीडिया की तस्वीरों से ऐसा लगता है कि अभिषेक ने वैभव को अपनी छत्रछाया में ले लिया है, और पूछा कि क्या यह सही है।

अभिषेक ने जवाब में कहा कि युवा खिलाड़ी की देखभाल उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी एक इंटरव्यू में बोल चुके हैं कि जब 15-16 साल का इतना टैलेंटेड खिलाड़ी, जैसा भारतीय क्रिकेट में पहले कभी नहीं देखा गया, टीम के साथ खेल रहा हो, तो सीनियर खिलाड़ियों में बड़े भाई वाली फीलिंग आती है।

सही माहौल, कोई दबाव नहीं

अभिषेक ने कहा कि वैभव से बड़े होने के नाते सभी सीनियर्स की जिम्मेदारी है कि उसे सही चीजें और सही माहौल मिले। उन्होंने कहा कि उस उम्र में वह और उनके साथी स्कूल में थे, 11वीं-12वीं में पढ़ रहे थे और अंडर-19 भी खेल रहे थे, इसलिए वह जानते हैं कि अच्छे सीनियर्स मिलने से युवा खिलाड़ी को कितना कॉन्फिडेंस मिलता है।

उन्होंने कहा कि ऐसा साथ मिलने से युवा खिलाड़ी को लगता है कि वह इसी जगह का है और एकदम से नहीं आया है। टीम में जब भी इस बारे में बात होती है, तो यही कहा जाता है कि वैभव अपना खेल एन्जॉय करे और उस पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए, खासकर बल्लेबाजी करते समय।

आजादी पर बनी साझेदारी

वेलिंगटन की साझेदारी में यही सोच मैदान पर दिखी, जहां दोनों बल्लेबाजों ने पहली गेंद से आक्रमण किया और भारत को तेज शुरुआत दिलाई। अभिषेक के लिए यह पारी रनों के साथ-साथ टीम के माहौल की भी कहानी है, जिसमें सीनियर्स ने युवा खिलाड़ी को बिना डर के अपना स्वाभाविक खेल खेलने का साथ दिया।