क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंदुलकर के लिए घर का स्वाद सिर्फ थाली में रखे खाने तक सीमित नहीं था। यह उनकी मां के हाथ के खाने, लंबे क्रिकेट टूर पर छूटी जानी-पहचानी खुशबू और लौटने से कुछ दिन पहले मां को फोन करके पसंदीदा डिशेज पक्की करने की छोटी सी रस्म से जुड़ा था।
लंबे टूर पर एक ही चीज की कमी
तेंदुलकर ने ये यादें एक इंस्टाग्राम वीडियो में ताजा की हैं, जिसे 2 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक घर से दूर रहने पर उन्हें अपनी मां के हाथ का खाना बहुत याद आता था, जिन्हें वह प्यार से आई कहकर पुकारते हैं। उन्होंने कहा, "मैं जब लंबे टूर पर होता था, तो एक चीज मिसिंग रहता था। आई के हाथ का खाना।"
घर आने से दो-तीन दिन पहले फोन
वह घर पहुंचने से दो या तीन दिन पहले मां को फोन करके बता देते थे कि उन्हें क्या खाना है। उनकी पसंदीदा डिशेज में वरण भात शामिल था, जो दाल और चावल की पारंपरिक महाराष्ट्रियन डिश है, और बटाटा भाजी, जो आलू की डिश है। इसके अलावा प्रॉन फ्राई भी उनकी पसंदीदा डिशेज में शामिल थी, जिसका टूर से लौटने के बाद वह इंतजार करते थे।
एक पारिवारिक रेसिपी, जिसका स्वाद दोहराना मुश्किल
एक डिश की याद तेंदुलकर के दिल में खास जगह रखती है। उन्होंने बताया कि उनकी मां एक खास मिश्रण बनाती थीं, जिसकी रेसिपी परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही थी, लेकिन उसका असली स्वाद दोहराना मुश्किल था। सामग्री और रेसिपी भले ही पता हो, लेकिन मां के बनाने के अंदाज में कुछ ऐसा था, जिससे वह डिश बिल्कुल वैसी नहीं बन पाती थी। यह इस बात की याद दिलाता है कि सबसे कीमती पारिवारिक रेसिपी में कागज पर लिखी विधि से कहीं ज्यादा यादें और भावनाएं छिपी होती हैं।
घी, हाथ से खाना और घर का सुकून
तेंदुलकर ने इन भोजनों के प्रति अपने लगाव को कैप्शन की एक चंचल पंक्ति में समेटा: "जिंदगी एक सफर है सुहाना, जब तक बनता है घर पे ऐसा खाना।" उनके लिए खाना खाने का तरीका भी मायने रखता था। भरपूर घी और हाथ से खाना भोजन को और भी संतोषजनक बना देता था, और घर का जाना-पहचाना सुकून वापस ले आता था। यह वीडियो तेंदुलकर के उस पहलू की झलक देता है, जो मैदान पर अक्सर नहीं दिखता: खेल की उपलब्धियों और सालों की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के पीछे एक ऐसा इंसान था, जो बाकी लोगों की तरह अपनी मां के हाथ के खाने के लिए घर लौटने के दिनों की गिनती करता था।