बाजार नियामक सेबी ट्रेडिंग टर्मिनल के दुरुपयोग को रोकने के लिए फ्रेमवर्क बना रहा है और स्टॉकब्रोकर्स के लिए उनके आकार, ग्राहक एक्सपोजर और तकनीक पर निर्भरता के आधार पर ग्रेडेड कंप्लायंस पर विचार कर रहा है, अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा।
यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क कुछ ब्रोकर्स द्वारा अपने ट्रेडिंग टर्मिनल के कथित दुरुपयोग की पृष्ठभूमि में आ रहा है। खबरों के मुताबिक कुछ ब्रोकिंग फर्मों ने फीस या मुनाफे में हिस्सेदारी के बदले व्यक्तिगत ट्रेडर्स को अपने खातों से ट्रेड करने दिया, जिससे मार्जिन और खुलासे के नियमों को कथित तौर पर दरकिनार किया गया।
टर्मिनल की मैपिंग MAC एड्रेस और स्टैटिक IP से होगी
विचाराधीन उपायों में टर्मिनल को उनके मीडिया एक्सेस कंट्रोल (MAC) एड्रेस और स्टैटिक IP एड्रेस से जोड़ना शामिल है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ट्रेड कहां से हो रहे हैं और टर्मिनल कौन इस्तेमाल कर रहा है।
पांडे मुंबई में एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) के 16वें इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने नियमों को आसान बनाने, बाजार को गहरा करने, जिम्मेदार तकनीक को बढ़ावा देने और निवेशकों की पहुंच बढ़ाने के लिए सेबी का रोडमैप रखा।
ब्रोकर्स के लिए ग्रेडेड कंप्लायंस और आसान नियम
नियामक सरलीकरण पर पांडे ने कहा कि सेबी स्टॉकब्रोकर्स के लिए ग्रेडेड कंप्लायंस पर विचार कर रहा है, जिसमें उनके आकार, ग्राहक एक्सपोजर और तकनीक पर निर्भरता को ध्यान में रखा जाएगा। नियामक डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स के नियमों को भी नए सिरे से तैयार कर रहा है ताकि कंप्लायंस आसान हो और धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा मजबूत हो।
सेबी कॉमन रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म को डिपॉजिटरी तक बढ़ा रहा है, जिससे एक ही सबमिशन स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरी दोनों के काम आ सकेगा। टेंडर ऑफर, बायबैक और ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए समानांतर क्लियरिंग जरूरतों से आने वाली अतिरिक्त लागत पर भी काम हो रहा है, यह इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम के सुझावों पर किया जा रहा है। ऑटोमेटेड गिव-अप और टेक-अप सुविधा को कैश सेगमेंट में कस्टोडियल ग्राहकों, जिनमें पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (AIFs) शामिल हैं, तक बढ़ाया जा रहा है, ताकि कस्टोडियन की पुष्टि का इंतजार करते हुए ग्राहकों का पैसा ब्लॉक न रहे।
शॉर्ट सेलिंग, कॉरपोरेट बॉन्ड और टोकनाइजेशन की समीक्षा
सेबी शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग नियमों की समीक्षा कर रहा है ताकि बाजार में लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी बेहतर हो, कॉरपोरेट बॉन्ड के सेकेंडरी मार्केट ट्रेडिंग को बढ़ावा देने के लिए मार्केट मेकिंग फ्रेमवर्क बना रहा है, और टेंडर ऑफर, बायबैक और OFS की कंप्लायंस लागत घटाने पर काम कर रहा है।
डीमैट 2.0 पहल के अगले चरण में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड होंगे। सेबी एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सैंडबॉक्स पर विचार कर रहा है जहां नए टूल्स को सुरक्षित तरीके से परखा जा सके, और अपने इंस्पेक्शन पोर्टल को एक ही डिजिटल वर्कफ्लो में लाने की योजना है ताकि निगरानी तेज और एक जैसी हो।
साइबर सुरक्षा कारोबारी प्राथमिकता, वैश्विक निवेशकों के लिए आसान पहुंच
पांडे ने चेतावनी दी कि तकनीक ने वित्तीय बाजारों की गति और पहुंच बढ़ाई है, लेकिन साइबर हमलों जैसे नए जोखिम भी पैदा किए हैं। उन्होंने ब्रोकर्स से साइबर सुरक्षा को सिर्फ सूचना प्रौद्योगिकी खर्च नहीं, बल्कि कारोबारी प्राथमिकता मानने को कहा, चेतावनी दी कि एक आउटेज से कुछ ही मिनटों में हजारों निवेशक प्रभावित हो सकते हैं और सुरक्षा सेंध से बाजार का भरोसा कमजोर हो सकता है।
सेबी वैश्विक निवेशकों, जिनमें अनिवासी भारतीय (NRIs) शामिल हैं, के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग, आसान KYC और कम कागजी कार्रवाई के जरिए भारतीय बाजारों में निवेश आसान बनाने की योजना बना रहा है, जबकि सुरक्षा उपाय बने रहेंगे। पांडे ने कहा कि भारत के पूंजी बाजार बढ़कर करीब 470 लाख करोड़ रुपये के इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन, लगभग 61 लाख करोड़ रुपये के बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड और करीब 83 लाख करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट तक पहुंच गए हैं, 15 करोड़ से ज्यादा यूनिक निवेशक हैं और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के पास करीब 74 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है, हालांकि भागीदारी बढ़ाने की काफी गुंजाइश बाकी है।