महाराष्ट्र की एक पर्वतारोही और खोजकर्ता को 16,000 फीट की ऊंचाई पर एक अभियान के दौरान पीरियड आने के बाद जुगाड़ करना पड़ा, क्योंकि आसपास न सैनिटरी पैड थे और न मदद के लिए कोई अन्य महिला थी। उन्होंने टिशू पेपर और मेडिकल टेप से एक घरेलू पैड बनाया और इस पूरी प्रक्रिया को वीडियो में दिखाया।

योगेश्वरी बोहारे ने यह वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया, जिससे ऊंचाई वाले अभियानों में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों की एक झलक मिली।

क्लिप में बोहारे कैमरे के सामने खड़ी होकर बताती हैं कि उनका पीरियड पिछली रात शुरू हुआ था। आसपास कोई अन्य महिला न होने और उस स्थान पर अभी चार से पांच दिन और बचे होने के कारण उन्होंने जो सामान उपलब्ध था, उसी से काम चलाने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, "मुझे कल रात पीरियड आया, यहां कोई महिला नहीं है, मैं अकेली हूं। और हमें अभी यहां 4-5 दिन और रहना है। इसलिए मैं टिशू पेपर और डॉक्टर टेप से सैनिटरी पैड बनाने की कोशिश कर रही हूं। मैंने टिशू पेपर की परतें लगाई हैं ताकि यह काफी मोटा हो जाए।"

इसके बाद उन्होंने सावधानी से टिशू पेपर की कई परतें लगाईं, उन्हें मोड़कर एक मोटा घरेलू पैड बनाया और किनारों को मेडिकल टेप से चिपकाया। पैड तैयार होने के बाद उन्होंने इसे कैमरे की ओर उठाकर कहा, "देखते हैं यह काम करता है या नहीं।"

वीडियो साझा करते हुए बोहारे ने बताया कि उन्हें जुगाड़ इसलिए करना पड़ा क्योंकि आसपास कोई अन्य महिला नहीं थी और सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं थे।

उन्होंने लिखा, "पहाड़ आपको चढ़ाई से ज्यादा सिखाते हैं; वे आपको हालात के अनुसार ढलना, जीवित रहना और मुश्किल समय में समाधान खोजना सिखाते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि पीरियड अभियानों के लिए नहीं रुकते और पहाड़ों में महिलाएं ऐसी चुनौतियों का सामना करती हैं जिन पर शायद ही चर्चा होती है।

वीडियो पर दर्शकों ने सलाह और हौसला साझा किया। एक यूजर ने आगे की यात्राओं में मेंस्ट्रुअल कप साथ रखने का सुझाव दिया, जबकि दूसरे ने एडवेंचर चेकलिस्ट में पीरियड उत्पाद शामिल करने के महत्व पर जोर दिया।

तीसरे यूजर ने उनके हौसले की तारीफ करते हुए लिखा, "हम खून बहाती हैं, हम चढ़ती हैं, हम जीवित रहती हैं। यही एक महिला की ताकत है।"