जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने तीन सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिन पर बिना अनुमति कैंपस में घुसने और छात्रों को भड़काने का आरोप है। वहीं छात्रों के संगठन SFI ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने गेट नंबर 7 के बाहर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया है, और सामने आए वीडियो में पुलिस छात्राओं को जबरन उठाकर ले जाती दिख रही है।
छात्र क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं
जामिया में साल 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। पिछले दो हफ्तों से छात्र चुनाव बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, और चार छात्र 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि छात्र संघ के नए संविधान का ड्राफ्ट छात्रों की भागीदारी से बने और इसी सेमेस्टर में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो।
यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रोफेसरों की सात सदस्यीय समिति छात्रों से चार दौर की वार्ता कर चुकी है, और 21 अक्टूबर को छात्र संघ के नए संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी भी गठित की गई है। छात्रों का पक्ष यह है कि ड्राफ्ट बनाने वाली कमेटी में छात्र भी शामिल होने चाहिए, और यही एक बड़ा पेच है।
सांसदों पर FIR और गेट नंबर 7 पर हिरासत
यूनिवर्सिटी की शिकायत के अनुसार, तीन सांसद बिना अनुमति कैंपस में घुसे और प्रदर्शनकारी छात्रों को उकसाया। यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि कुछ छात्रों ने टीचरों और गार्डों के साथ धक्का-मुक्की की। अलग से, शुक्रवार को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी छात्रों के समर्थन में जामिया पहुंचे थे, और दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया था।
SFI की जामिया इकाई ने आरोप लगाया है कि प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकारों ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के टेंट उखाड़ दिए और छात्राओं के साथ बदसलूकी की, और पुलिस ने गेट नंबर 7 के बाहर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया। ये आरोप छात्रों के पक्ष से हैं, जबकि प्रशासन ने गलत काम से इनकार किया है और कहा है कि उसके स्टाफ ने करीब दो घंटे तक छात्रों को समझाने की कोशिश की।
कैंपस ऑनलाइन, प्रदर्शन जारी
सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी ने शनिवार से सभी क्लासेस ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दी हैं और छात्रों को कैंपस न आने की सलाह दी है। यूनिवर्सिटी के गेट और लाइब्रेरी भी अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं।
शनिवार को वाइस चांसलर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी के नेतृत्व में लगभग 1,500 टीचर और गैर-शिक्षण कर्मचारी गेट नंबर 7 पहुंचे थे। उन्होंने करीब दो घंटे तक प्रदर्शनकारी छात्रों को आंदोलन खत्म करने के लिए समझाया, लेकिन छात्र नहीं माने।
प्रदर्शनकारियों की अब क्या मांगें हैं
चुनाव की तारीखों के अलावा प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई वापस ली जाए और बल प्रयोग के विरोध में चीफ प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार इस्तीफा दें। प्रशासन का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के लिए गेट नंबर 18 तय है और गालिब लॉन में धरना पूरी तरह अनाधिकृत है।