किडनी की सेहत जांचने के लिए जब केएफटी कराया जाता है, तो रिपोर्ट में क्रिएटिनिन, यूरिया और कई बार सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की वैल्यू भी देखी जाती है। यदि रिपोर्ट में सोडियम का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

केएफटी में सोडियम क्यों देखा जाता है

सोडियम एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है, जो शरीर में कोशिकाओं के बाहर मौजूद तरल पदार्थ में पाया जाता है। यह शरीर में पानी के वितरण, ब्लड प्रेशर और नर्वस तथा मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। स्वस्थ किडनी जरूरत के अनुसार सोडियम और पानी को शरीर में बनाए रखने या पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती है। केएफटी या इससे संबंधित ब्लड टेस्ट में सोडियम की जांच से डॉक्टर को शरीर के फ्लुइड बैलेंस और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस के बारे में जानकारी मिलती है। यह विशेष रूप से उन लोगों में उपयोगी हो सकती है, जिन्हें किडनी की बीमारी, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त या ऐसी कोई समस्या है जो शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हर लैब के केएफटी पैनल में सोडियम शामिल हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ जगह इसे इलेक्ट्रोलाइट पैनल, बेसिक मेटाबॉलिक पैनल या कॉम्प्रीहेनशन मेटाबॉलिक पैनल के अंतर्गत जांचा जाता है। किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर क्रिएटिनिन, eGFR और जरूरत के अनुसार यूरिन एलब्यूमिन जैसे परिणाम भी देखते हैं।

ब्लड सोडियम का नॉर्मल रेंज क्या होता है

वयस्कों में ब्लड सोडियम का सामान्य स्तर आमतौर पर 135 से 145 mEq/L माना जाता है। इसे mmol/L में भी व्यक्त किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग प्रयोगशालाओं की रेफरेंस रेंज में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपनी रिपोर्ट पर दी गई रेंज को भी देखना जरूरी है। 135 mEq/L से कम स्तर को लो सोडियम यानी हाइपोनेट्रिमिया कहते हैं। 135 से 145 mEq/L को सामान्य सोडियम स्तर कहा जाता है। 145 mEq/L से ज्यादा स्तर को हाई सोडियम यानी हाइपरनेट्रिमिया कहते हैं। सोडियम का स्तर सामान्य सीमा से थोड़ा बाहर होने पर भी रिपोर्ट की व्याख्या व्यक्ति के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री, दवाओं और अन्य जांचों के साथ की जाती है। उदाहरण के लिए, ब्लड शुगर बहुत ज्यादा होने पर सोडियम की मापी गई वैल्यू कम दिखाई दे सकती है। इसलिए किसी एक नंबर के आधार पर खुद से इलाज शुरू नहीं करना चाहिए।

सोडियम कम होने पर हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण

जब खून में सोडियम का स्तर 135 mEq/L से नीचे चला जाता है, तो इस स्थिति को हाइपोनेट्रिमिया कहते हैं। इसके लक्षणों में थकान और कमजोरी महसूस होना, सिरदर्द या मतली, मांसपेशियों में ऐंठन, और ध्यान लगाने या सोचने में परेशानी शामिल हो सकती है। गंभीर स्थिति में भ्रम, दौरे या बेहोशी हो सकती है। सोडियम कम होने पर शरीर की कोशिकाओं में पानी जाने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। गंभीर मामलों में मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन हो सकती है, जिससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा हो सकते हैं। लक्षणों की गंभीरता सोडियम कितना कम है और कितनी तेजी से गिरा है, इस पर निर्भर करती है।

सोडियम बढ़ने पर हाइपरनेट्रिमिया के लक्षण

जब सोडियम का स्तर 145 mEq/L से ऊपर हो जाता है, तो इसे हाइपरनेट्रिमिया कहते हैं। इसके लक्षणों में बहुत ज्यादा प्यास लगना, कमजोरी और बेचैनी, मांसपेशियों में फड़कन, और भ्रम या असामान्य व्यवहार शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में दौरे या बेहोशी हो सकती है। सोडियम बढ़ने पर अक्सर शरीर में पानी की कमी होती है, हालांकि इसके अन्य कारण भी संभव हैं। यदि सोडियम का स्तर बहुत ज्यादा हो जाए, तो मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं। अचानक भ्रम, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण होने पर तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।

असामान्य वैल्यू का मतलब हमेशा किडनी खराब होना नहीं है

केएफटी रिपोर्ट में सोडियम का कम या ज्यादा होना शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन का संकेत हो सकता है। इसके पीछे डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, कुछ दवाएं, हार्मोन संबंधी समस्याएं या किडनी की बीमारी जैसे कारण हो सकते हैं। हालांकि, सोडियम की असामान्य वैल्यू का मतलब हमेशा किडनी खराब होना नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर अन्य जांचों और लक्षणों के साथ रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हैं। समय पर जांच और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।