तटीय कर्नाटक और कासरगोड के 500 से अधिक उमराह यात्री सऊदी अरब में फंसे हुए हैं। मध्य पूर्व में तनाव के कारण एयरलाइनों ने उड़ानें रोक दी हैं, जिससे यात्रियों की वापसी अटक गई है। कर्नाटक सरकार ने यात्रियों की मदद और उन्हें वापस लाने के प्रयासों की कमान संभाल ली है।

24 अक्टूबर तक उड़ानें निलंबित

एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो ने प्रभावित मार्गों पर 24 अक्टूबर तक परिचालन रोक दिया है, जिससे सैकड़ों यात्री वापसी के रास्ते के बिना रह गए हैं। कुछ यात्री सड़क मार्ग से कतर जाकर वहां से वैकल्पिक उड़ानें पकड़ने में सफल रहे, लेकिन अधिकांश अब भी सऊदी अरब में फंसे हैं। टूर ऑपरेटरों, राजनीतिक नेताओं और चिंतित परिजनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है।

कर्नाटक सरकार राहत में जुटी

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू टी खादर ने कहा है कि अधिकारी फंसे हुए यात्रियों के लगातार संपर्क में हैं। राज्य हज समिति के अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों ने सऊदी अरब में यात्रियों से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया और मदद का भरोसा दिया। सऊदी रियाल के मुकाबले रुपये की कमजोर दर के कारण यात्रियों को सिर्फ खाने पर प्रति व्यक्ति रोज करीब 1,500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जिनके पास पैसे खत्म हो रहे हैं, उनके खाने की व्यवस्था की जाएगी और एक विशेष हेल्पलाइन भी बनाई जा रही है। फंसे यात्रियों को 24 और 27 अक्टूबर की उड़ानों में जगह दिलाने के प्रयास जारी हैं।

परिजनों ने विशेष बचाव उड़ानों की मांग की

परिजनों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से मांग की है कि इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया को रियाद या जेद्दा से सीधे विशेष बचाव उड़ानें चलाने की तुरंत अनुमति दी जाए। पूर्व अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अब्दुल अजीम ने भी अधिकारियों से यात्रियों को सुरक्षित कर्नाटक वापस लाने के लिए तेज कार्रवाई की अपील की है। निजी एजेंटों के सस्ते पैकेज से गए कई यात्री बिना सहारे के रह गए बताए जाते हैं।

रिफंड पर अनिश्चितता से बढ़ी परेशानी

कर्नाटक राज्य हज आयोजक संघ के अध्यक्ष इकबाल सिद्दीकी ने कहा कि रद्द उड़ानों के टिकटों का रिफंड दिलाने के लिए अधिकारियों से बातचीत जारी है, जिससे फंसे यात्रियों को नए टिकट खरीदने में मदद मिलेगी। हालांकि बजट पैकेज लेने वाले कई यात्रियों को पूरा रिफंड नहीं मिल सकता, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि घर लौटने के टिकटों पर उन्हें फिर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।